सप्तऋषि आश्रम के मैदान पर भारत माता मंदिर की ओर से आयोजित श्री गंगामाता महायज्ञ के चौथे दिन विराट संत सम्मेलन में संतों ने गंगा की दशा पर चिंता जताई। संतों ने गंगा की रक्षा के लिए सतत प्रयास करने का संकल्प लिया ही लोगों को भी इसके लिए काम करने को प्रेरित किया।
संत सम्मेलन में मुख्य अतिथि कार्ष्णिपीठाधीश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने आयोजन की सराहना करते हुए इसके लिए आयोजक महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज का आभार जताया। उन्होंने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इस महायज्ञ से गंगा की निर्मलता और पावनता बनाए रखने के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ऋषि परंपरा के प्रत्यक्ष स्वरूप हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को सराहा। भानुपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए काम करना सभी का परम धर्म है।
इस दौरान जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रहमचारी, रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज, प्रज्ञा भारती, महामंडलेश्वर अर्जुनपुरी, स्वामी हरिचेतनानंद आदि संतों ने विचार रखे। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, महंत कमलदास, भक्त दुर्गादास, हरिवल्लभदास शास्त्री, स्वामी माधव प्रिय दास, महामंडलेश्वर स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री समेत बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। भारत माता मंदिर के मुख्य प्रबंध न्यासी आईडी शर्मा शस्त्री श्रीमहंत ललितानंद, सुरेश केडिया, भूपेंद्र कौशिक, शरद पुरोहित आदि ने संतों का स्वागत किया। संचालन महामंडलश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद, आईडी शर्मा शास्त्री ने किया। मुंबई से आए जाने-माने फिल्मकार प्रकाश झा भी आकर्षण का केंद्र रहे।
आचार्य बालकृष्ण को समन्वय अलंकरण से सम्मानित
योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में किए गए योगदान को अमूल्य बताते हुए पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को भारत माता मंदिर की ओर से दिए जाने वाला समन्वय पुरस्कार संतगण द्वारा प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र, शॉल गंगाजलि और दो लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने इस सम्मान के लिए चुने जाने पर सभी का आभार जताया।