सरकारी काम काज में पारदर्शिता लाने के लिए आम आदमी को दिया गया सूचना का अधिकार समाज कल्याण विभाग में दलालों का हथियार बन गया है। सूचना के अधिकार में विभाग से पेंशन व छात्रवृत्ति के लाभार्थियों की जानकारी लेकर लाभ दिलाने के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। विभाग की मजबूरी यह है कि आरटीआई का जवाब देना जरूरी है और दलाल इससे जमकर कमाई कर रहे हैं।
आरटीआई का दुरुपयोग यूं तो तमाम विभागों में हो रहा है। कुछ लोग अपने स्वार्थों की पूर्ति और रंजिश निकालने में इसका इस्तेमाल कर रहे है। अलबत्ता समाज कल्याण विभाग में आरटीआई दलालों के लिए कमाई का जरिया बनकर रह गया है। खुद को आरटीआई कार्यकर्ता बताने वाले जिले के अलग अलग गांवों के तमाम ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ विभाग से लगातार पेंशन और छात्रवृत्ति के लाभार्थियों की सूची आरटीआई से मांगते हैं।
अपने आस पास के गांव बस्ती के लाभार्थियों का पता चलने पर दलाल उन लोगों से संपर्क साधते हैं और उन्हें विभाग में अपनी अच्छी जान पहचान होने का झांसा देकर रकम ऐंठते हैं। कई बार लाभार्थी सीधे विभाग में पहुंचते हैं और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करा देते हैं। ऐसी कई शिकायतें समाज कल्याण और प्रशासन के अधिकारियों को मिल चुकी हैं। जिससे साफ है कि दलाल आरटीआई का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने का काम भी कर रह हैं।
देहात के लोग बन रहे शिकार
आरटीआई को धंधे के तौर पर अपनाने वाले लोग शहर गांव सभी जगह हैं। मगर उनका शिकार अधिकांश देहात के लाभार्थी बन रहे हैं। रुड़की, मंगलौर, भगवानपुर, झबरेड़ा, लक्सर, खानपुर के आस पास गांवों में ऐसे लोगों ने अपना पूरा जाल बिछाया हुआ है। विभागीय लिपिक उन्हीं लोगों को एक जैसी सूचनाएं देते देते थक चुके हैं।