नामांकन करने के बाद अब प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों ने रूठों को मनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए राजनीतिक दलों की ओर से नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी है।
जनपद की 11 सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा की ओर से अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा गया। टिकटों को लेकर चली काफी खींचतान के चलते दोनों ही दलों को दो से तीन सूची में अपने प्रत्याशियों की घोषणा करनी पड़ी है। ज्वालापुर सीट पर कांग्रेस पर प्रत्याशी बदले भी गए हैं। इससे टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बगावती तेवर अपना लिए थे। कोई टिकट नहीं मिलने से अपने घर में बैठे गया है तो किसी ने इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है।
कुछ दावेदारों ने निर्दलीय नामांकन किया है। जिससे पार्टियों की ओर से घोषित प्रत्याशियों के साथ ही राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। टिकट होने के बाद अभी तक तो नामांकन करने में घोषित उम्मीदवार व्यस्त थे। अब नामांकन करने के बाद भाजपा-कांग्रेस में टिकटों के मचे घमासान को थामने के ल्रिए त्याशियों और पार्टी नेताओं ने कसरत शुरू कर दी है। इन्हें सरकार बनने पर सरकार में दायित्वधारी और पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारियों देने के प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं।