गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग एवं आईक्यूएसी की ओर से चल रही शोध प्रविधि एवं प्रकाशन नैतिकता पर छह दिवसीय कार्यशाला संपन्न हो गई। उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं शोध केंद्र की ओर से हुई कार्यशाला में देशभर से डेढ़ सौ शोध अध्येता और शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. हेम चंद्र पांडेय ने कहा कि गुणवत्तापरक शोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में रेखांकित कर शोधकर्ता को गहरा आत्म संतोष मिलता है। शोध सामुदायिक विकास के काम आता है। शोध ही के कारण दैनिक जीवन की दिक्कतें आसान होती हैं।
विशिष्ट अतिथि लाल कुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि शोध समसामयिक एवं यथार्थपरक होना चाहिए। शोध आम आदमी के जीवन में बदलाव का साधन बने और समाज में बदलाव में सहयोग करे यही शोध की उपयोगिता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों की समस्याओं को ध्यान में रखकर नूतन शोध करें। ताकि उनके शोध से उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पलायन की समस्या को रोकने के लिए शोध किए जाने चाहिए।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि शोध समाज को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकता है। उन्होंने कहा कि शोध का उपयोग स्त्री सशक्तिकरण के लिए किया जाना चाहिए। आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. आरसी दुबे ने कहा कि शोध सदैव मानव मस्तिष्क में प्रारंभ होता है। प्रयोगशाला, पुस्तकालय इसके साधन हैं। इस मौके पर कुल सचिव डॉ. सुनील कुमार, डॉ. हेमवती नंदन, प्रो. एलपी पुरोहित, डॉ. हिमांशु पंडित, प्रो. चंदरम शिवा, डॉ. अजय मलिक, डॉ. गगन माटा, डॉ. प्रिंस, डॉ. मनीला आदि मौजूद रहे।