शिक्षकों के फर्जीवाड़े से जुड़ी एक और कड़ी निकल कर सामने आई है। पड़ताल में सामने आया है कि शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिर्फ सरकारी नौकरी ही हासिल नहीं की, बल्कि प्रमोशन के लिए भी जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। कई शिक्षकों ने खुद के अनुसूचित जाति से संबंधित होने के प्रमाण पत्र भी विभाग को फर्जी दिए हैं। जांच की जद में आए शिक्षकों के अलावा कई अन्य शिक्षक भी संदेह के दायरे में हैं।
हरिद्वार में बड़े पैमाने पर शिक्षकों का फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ चुका है। उसके बाद विभाग के फर्जी सत्यापन और शिक्षकों के दस्तावेज गुम होने संबंधी फर्जी हलफनामे की पोल खुल चुकी है। खुलासों की कड़ी में पता चला है कि कई शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों से पदोन्नति भी पाई है। सूत्र बताते हैं कि शिक्षकों ने प्रमोशन पाने के लिए खुद को अनुसूचित जाति में दर्शाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। अभी तक विभाग की जांच का दायरा बीटीसी की मार्कशीट और डोमीसाइल तक था। लेकिन अब जाति सहित अन्य प्रमाण पत्र भी खंगाले जाएंगे। सिर्फ बर्खास्त या सस्पेंड शिक्षक ही नहीं संदेह के आधार पर कई अन्य शिक्षकों के दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
करोड़ीमल है फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड
शिक्षकों के फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड माना जा रहा बर्खास्त शिक्षक करोड़ीमल बताया जा रहा है। पड़ोसी जिले में उसकी तीन मंजिला कोठी से लेकर तमाम बेनामी संपत्तियां और भारी भरकम बैंक बैलेंस होने की जानकारी मिल रही है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ के हत्थे चढ़ चुके शिक्षक के खिलाफ यूपी में एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे भी दर्ज हैं। यूपी एसटीएफ के हाथों जाली मार्कशीट, टीसी व नकली मुहर के साथ गिरफ्तार होने और तमाम मुकदमे दर्ज होने के बावजूद मास्टर माइंड अभी तक नौकरी कैसे करता रहा इस पर सभी सवाल उठा रहे हैं।
डीईओ के तबादले की लगाई जा रही जुगत
तमाम दबाव और धमकियों को दरकिनार कर अपने दम पर फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले डीईओ बेसिक रामेंद्र कुशवाहा के खिलाफ अब दागी शिक्षकों और उनके आकाओं ने लामबंदी शुरू कर दी है। पूरी लॉबी जल्द उनका तबादला कराने के जुगत में है। हालांकि उनका ट्रांसफर पिछले महीने ही उत्तरकाशी हो चुका है। शासन के कुछ अफसरों ने उन पर भरोसा जताते हुए इस खुलासे की जांच होने तक उन्हें जिले में ही रहने को कहा है। फर्जीवाड़े की जांच में जिस तरह एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं उससे दागी शिक्षकों की नींद उड़ी हुई है। बर्खास्त शिक्षकों को रिकवरी से लेकर जेल जाने तक का डर सता रहा है। सूत्र बताते हैं कि दागी शिक्षक अब एकजुट होकर डीईओ बेसिक के जल्द तबादले के प्रयास में जुट गए हैं। साथ ही फर्जी सत्यापन के दौरान जिले में तैनात रहे एक अधिकारी को दोबारा जिले में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि आरोपी शिक्षकों को राहत मिल सके।