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‘सत्ता में आने के लिए करते हैं राम राज्य स्थापना के वायदे’

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मंगलमय परिवार की और से आयोजित गोष्ठी में पुस्तक का विमोचन करते पदाधिकारी । - फोटो : HARIDWAR
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मंगलमय परिवार एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं की ओर से ‘वर्तमान परिदृश्य और मानव उत्थान में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता श्रीराम कथा वाचक संत विजय कौशल ने कहा कि आज हर पार्टी का नेता सत्ता में आने पर राम राज्य की स्थापना करने के वायदे करता है। दूसरे का वेष धारण करना सरल है, लेकिन आचरण में उतारना बहुत कठिन है।
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ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के पंडित मदन मोहन मालवीय सभागार में आयोजित गोष्ठी में संत विजय कौशल ने कहा कि भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम के व्यक्तित्व से देश की जनता भलीभांति परिचित है। राम का नाम सुनते ही हमारे मानस पटल पर मर्यादा पुरुषोत्तम व्यक्ति की छवि अंकित होती है। श्रीराम का चरित्र आदर्शवादी हैं। जिनसे संसार का प्रत्येक व्यक्ति प्रेरणा लेता है। उन्होंने कहा कि राम ने अपने जीवन काल में प्रत्येक भूमिका का निर्वाह श्रेष्ठतापूर्वक किया। श्रीराम ने धर्मशील राजधर्म का पालन किया।
पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल ने कहा कि राम का जन्म राज्य भोगने के लिए नहीं बल्कि जगत के मंगल के लिए हुआ।
गोष्ठी में बालकृष्ण शास्त्री द्वारा सम्पादित पुस्तक अनुपम भजन संग्रह का विमोचन किया गया। डॉ. नरेश चौधरी को कोविड काल की सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान अविनाश चंद ओहरी, रमणीक, बृजभूषण विद्यार्थी, डा. जितेंद्र सिंह, श्रवण गुप्ता, रमेश उपध्याय, अनिल गुप्ता, निशांत कौशिक, करन मल्होत्रा आदि मौजूद रहे। संचालन विमल कुमार और डॉ. हिमांशु पंडित ने किया।
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