हरिद्वार। महिला अस्पताल में कभी चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की कमी का फायदा प्राइवेट अस्पताल सीधे तौर पर उठाते थे। अब जब अस्पताल में तीन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हो गईं तब भी गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। इनमें शुक्रवार को जो मामला सामने आया इसमें एक महिला चिकित्सक पर गंभीर आरोप है। गर्भवती और उसके परिजनों का कहना है कि महिला चिकित्सक ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल में जबरन भेजने का प्रयास किया।
परिजनों का कहना है कि पहले तो उन्हें भर्ती करते ही रेफर कर दिया गया। महिला चिकित्सक ने उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का सुझाव दिया। जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उन्हें फ्री की एंबुलेंस मिली और एक बिना परिचित व्यक्ति मिला जो रास्ता दिखाने में लगा रहा। इस पर उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने अपने रिश्तेदार जो एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं उनसे संपर्क किया। रिश्तेदार ने उनसे सरकारी योजनाओं से संबद्ध अस्पताल में पहुंचने की बात की।
बताया कि वह जब आयुष्मान कार्ड होने की बात कहकर रिश्तेदार की तैनाती वाले अस्पताल में जाने लगे तो साथ में बैठा अपरिचित व्यक्ति और एंबुलेंस चालक उनसे उलझ गए। वह दोनों मारपीट पर आमादा हो गए। इस प्रकरण को गर्भवती के परिजनों ने तत्काल अपने रिश्तेदार को बताया तो वह सहयोग में अपने अस्पताल के चिकित्सक की टीम के साथ पहुंचे। देश रक्षक चौराहे पर हंगामे के बाद गर्भवती को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया और दलाल समेत एंबुलेंस चालक को दूसरे अस्पताल में तैनात रिश्तेदार ने मौके से खदेड़ा।
बताया जा रहा है कि प्रसव काफी देर से होने से शिशु की हालत गंभीर हो गई। उसे उच्च स्तर की चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। चिकित्सा कर्मियों का कहना है कि गर्भवती के रिश्तेदार की सक्रियता के चलते गर्भवती और शिशु दोनों फिलहाल अभी खतरे से बाहर हैं। बच्चे को चाइल्ड केयर यूनिट के तहत विशेष सुरक्षा प्रणाली में रखा गया है।
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तीमारदार करेंगे शिकायत
गर्भवती जिले के ग्रामीण क्षेत्र से है। उसके तीमारदारों का कहना है कि जच्चा बच्चा सुरक्षित हो जाएं फिर वह इस प्रकरण को उचित फोरम पर उठाएंगे।