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पीएम मोदी को मिली राष्ट्रऋषि की उपाधि

Wed, 03 May 2017 09:29 PM IST
राजेश शर्मा हरिद्वार
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राष्ट्रनायक और नमो जैसे नाम से अलंकरित देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब राष्ट्रऋषि भी कहलाएंगे। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश में सत्ता परिवर्तन की अलख जगाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के मंच पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह उपाधि प्रदान की।
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  सामान्य तौर पर पतंजलि योगपीठ में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन होते रहते हैं। बुधवार को नजारा एकदम बदला हुआ था। करीब चार साल बाद पतंजलि योगपीठ आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहां आज नई उपाधि राष्ट्रऋषि से नवाजा गया। पतंजलि योगपीठ की ओर से इस उपलक्ष्य में बाकायदा न केवल भव्य समारोह का आयोजन किया गया था बल्कि विधि विधान से मंगलाचारण और अन्य मंत्रोच्चारण के साथ सभी पारंपरिक औपचारिकताएं भी पूरी की गई। पतंजलि के योगाचार्यों, आचार्यकुलम के बच्चों के मंत्रोच्चारण के बीच बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने जब प्रधानमंत्री को शॉल ओढ़ाया और स्मृति चिह्न भेंट किया तो पूरा सभागार भारत माता की जय और वंदेमातरम के जयकारों से गूंज उठा। सभागार में मौजूद योग प्रशिक्षार्थी, आचार्यकुलम के योगार्थी, पतंजलि परिवार के सदस्य एक पत्रक पर छपे श्लोकों का वाचन कर रहे थे और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण उसका हिंदी में अनुवाद करते हुए यह बता रहे थे कि नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की किन खूबियों के कारण उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। हर बार पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
बाबा रामदेव ने कहा कि नरेंद्र मोदी का पूरा व्यक्तित्व एक ऋषि की तरह है। वे हमेशा देश के लिए ही सोचते और करते हैं। मोदी में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रऋषि की उपाधि से नवाजते हुए पतंजलि परिवार खुद को भी गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
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 सम्मान पाकर अभिभूत दिखे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंजलि परिवार के साथ ही सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई सम्मान मिलता है तो वह नई जिम्मेदारी का अहसास भी कराता है। वे नई जिम्मेदारी के अहसास के साथ काम करेंगे।

पांच लाख लोगों को रोजगार देगी पतंजलि: रामदेव
योग गुरु बाबा रामदेव ने बुधवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए दावा किया कि आगामी पांच साल में पतंजलि योगपीठ पांच लाख लोगों को रोजगार देगी और करीब पांच करोड़ किसानों को जोड़कर उन्हें खुशहाल  बनाएगी।    
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंच पर मौजूदगी में अतिथियों का स्वागत कर रहे बाबा रामदेव ने अपने पुराने दिनों की याद ताजा की। बाबा रामदेव संबोधित करते हुए संघर्ष के दिनों की यादों में खो गए। बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने करीब 15 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। इसी दौर में आचार्य बालकृष्ण जैसे साथी मिले । गुरुजनों के आशीर्वाद से अभावों, परेशानियों और चुनौतियों के बीच आगे बढ़े। योग, आयुर्वेद और स्वदेशी को लेकर आंदोलन चलाया। उन्होंने कहा कि आज सभी की शुभकामनाओं का परिणाम है कि पतंजलि योगपीठ में करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है और करीब एक करोड़ किसानों को पतंजलि योगपीठ ने जोड़ा है। उन्होंने दावा किया कि अगले पांच साल में पांच लाख लोगों को रोजगार देंगे और करीब एक करोड़ किसानों को जोड़ा जाएगा।     

 अपने बारे में बार-बार सोशल मीडिया में किए जा रहे दुष्प्रचार को लेकर बाबा ने कहा कि आज कई लोग यह सोचते रहते हैं कि बाबा कब गिरेगा, बाबा कब मरेगा। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर दिया गया कि सड़क दुर्घटना में बाबा रामदेव परलोकवासी हो गए हैं, लेकिन आप सभी की दुआ से मैं इसी लोक में हूं। उन्होंने कहा कि जब तक आप सभी की शुभकामना और मोदी जी जैसे शुभचिंतक हैं तब तक न तो यह देश गिरेगा और न ही बाबा गिरेगा। उन्होंने कहा कि भारत तभी समृद्ध बन सकेगा जब दो तरह की दरिद्रता दूर होगी। उन्होंने वैचारिक दरिद्रता और आर्थिक दरिद्रता को दूर करने की बात कही। वहीं भारत के पुनरुद्धार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत और विकसित भारत का निर्माण करने में मोदी जी जो भी यज्ञ रूपी प्रयास कर रहे हैं उनमें एक आहुति पतंजलि योगपीठ की जरूर पड़ेगी। मोदी ने हाथ जोड़कर उनके प्रति कृतज्ञता की।

बाबा रामदेव के भजन पर झूमे साधक
पतंजलि अनुसंधान केंद्र के उद्घाटन के मौके पर हजारों योग साधकों ने बाबा रामदेव को एक भजन गायक के रूप में सुना। बाबा ने सुर और ताल के संगम से ऐसा समां बांधा कि हर कोई हैरान रह गया। वहीं आचार्यकुलम के एक ब्रह्मचारी ने बाबा रामदेव पर रचित गीत प्रस्तुत किया। जिसमें बाबा रामदेव को स्वामी दयानंद का अवतार बताया गया।     

उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से पहले बाबा रामदेव ने देशभर से आए योग साधकों को योग और अध्यात्म की बातों से बांधे रखा। योग भवन के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर बाबा रामदेव को सुनते रहे। इस बीच बाबा रामदेव ने एक भजन ‘भगवान आर्यों को ऐसी लगन लगा दे, देश और धर्म की खातिर मिटना इन्हें सिखा दे’ प्रस्तुत किया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। देश दुनिया को योग सिखाने वाले बाबा रामदेव सुर और ताल में भी गुरु नजर आए। वहीं आचार्यकुलम के एक ब्रह्मचारी ने यारों सब दुआ करो कव्वाली की धुन पर ‘भाई एक संत निराला, गजब हरियाणे वाला, अवतार स्वामी दयानंद का’ प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। वहीं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के एक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण ने स्वतंत्रता आंदोलन का खाका खींचते हुए ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ गीत सुनाया। हालांकि ब्रह्मचारी और कार्यकर्ता दो मिनट से ज्यादा प्रस्तुति नहीं दे पाए। फिर भी कार्यक्रम में बाबा रामदेव के भजन व गीत संगीत ने सबका मन मोह लिया।

संस्कृत में स्वागत गीत     
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग भवन में पहुंचने पर आचार्यकुलम के ब्रह्मचारियों ने संस्कृत में उनका स्वागत अभिनंदन किया। मंच के सामने संस्कृत में स्वागत गीत प्रस्तुत किया जा रहा था और मंच के ऊपर आचार्य बालकृष्ण इसका हिंदी में अनुवाद कर रहे थे। इस स्वागत गीत में सर्जिकल स्ट्राइक जैसे पीएम मोदी के ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया गया।
  
ऐनवक्त तक होती रही रिहर्सल     
पतंजलि परिवार मोदी की मौजूदगी में समारोह की भव्यता में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। इसलिए पीएम मोदी के स्वागत गीत की प्रधानमंत्री के आने से ऐनवक्त पहले तक भी रिहर्सल कराई जाती रही। गीत के साथ-साथ तालियां बजाने की रिहर्सल भी कराई गई।   

मोदी को सुनने पतंजलि में उमड़ा लघु भारत
पतंजलि अनुसंधान केंद्र के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए हर राज्य से पतंजलि के साधक पहुंचे। देशभर से करीब 500 बसों में सवार होकर साधक हरिद्वार पहुंचे। अलग अलग वेष भूषा, बोलचाल और लोक संस्कृति को देखकर लगा कि मानो लघु भारत पतंजलि उमड़ आया हो। पतंजलि फेज वन से फेज टू के बीच दिनभर साधकों का रैला लगा रहा।   
 
  पतंजलि अनुसंधान केंद्र कई महीने पहले बनकर तैयार हो गया था। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसका उद्घाटन कराया जाए। आखिरकार बाबा और आचार्य की तमन्ना पूरी हुई। इस ऐतिहासिक समारोह का गवाह बनने के लिए पतंजलि योगपीठ और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से जुड़े हर राज्य के योग साधकों और कार्यकर्ताओं को न्योता दिया गया था। हालांकि आम दिनों में भी हजारों की संख्या में योग साधक हरिद्वार में मौजूद रहते हैं, पर इस कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या योग साधक दो दिन पहले से ही हरिद्वार पहुंचने शुरू हो गए थे।

उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड सहित देश के लगभग हर राज्य से योग साधक कार्यक्रम में पहुंचे। जबकि कार्यक्रम का संचालन कर रहे डा. जयवीर सिंह ने बताया कि सिर्फ चार पांच दिन पहले ही पतंजलि परिवार के सदस्यों को इस कार्यक्रम की सूचना दी गई। इसके बावजूद हजारों की संख्या में योग साधक व भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता बड़े उत्साह से ऐतिहासिक समारोह का हिस्सा बनने हरिद्वार पहुंचे।


पीएम ने किया आचार्य लिखित ग्रंथ का विमोचन
पतंजलि योगपीठ अनुसंधान केंद्र के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण द्वारा लिखित अनुसंधान ग्रंथ वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया का विमोचन भी किया।

बाबा रामदेव ने बताया कि पुस्तक में 70 हजार से अधिक जड़ी-बूटियों पर अनुसंधान के बारे में जानकारी दी गई है। इस बारे में 10 वर्षों से कार्य चल रहा है और 200 वैज्ञानिकों की टीम कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में अपनी तरह का यह खास ग्रंथ है। इसका लोगों को खासा लाभ मिलेगा।  विमोचन के दौरान मंच पर उपस्थित उत्तराखंड के राज्यपाल डा. केके पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, आचार्य बलदेव को भी आचार्य बालकृष्ण ने ग्रंथ की प्रतियां दी। विमोचन के बाद प्रधानमंत्री ने एक प्रति पर अपने हस्ताक्षर भी किए। आचार्य बालकृष्ण ने भी ग्रंथ के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी।
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