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मोदी-रामदेव के रिश्तों में अब नई गरमाहट

Wed, 03 May 2017 09:25 PM IST
विपिन बनियाल हरिद्वार
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पीएम नरेंद्र मोदी और बाबा रामदेव के रिश्तों में तल्खियां कभी नहीं रहीं, लेकिन एक गरमाहट का अभाव भी लगातार महसूस किया जा रहा था। केंद्र से कांग्रेस को उखाड़ फेंकने के अभियान के दोनों साथी रहे, लेकिन फि र भी जानी-अनजानी कुछ बातें तो जरूर थीं, जो दोनों के रिश्तों में गरमाहट तलाशने वालों को अखरा करती थीं। तरह-तरह की बातों को हवा तब और मिलती थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी को पतंजलि योग पीठ लाने के प्रयास हर बार नाकाम हो जाते थे। चार साल पहले मोदी जब पीएम नहीं बने थे, तब पतंजलि योग पीठ आए थे। उसके बाद आते-आते उन्हें लंबा वक्त लग गया। मगर बुधवार को जब पीएम के पतंजलि योग पीठ में कदम पडे़, तो रामदेव के साथ रिश्तों में एक नई गरमाहट भर गई। मोदी-रामदेव दोनों ने एक-दूसरे को सम्मान देने में कोई कंजूसी नहीं बरती। गले मिले, हाथ मिलाया और आत्मीयता से कई मामलों पर चर्चा की।
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पहले बोलने का नंबर बाबा रामदेव का रहा, तो उन्होंने सधे हुए शब्दों में मोदी के विराट व्यक्तित्व से जुड़ी तमाम बातें साझा कर दीं। बाबा ने बाकायदा नारा गढ़ दिया-दिल से फकीर है, हिंदुस्तान की तकदीर है। उन्होंने ये भी कहा-पूर्व के प्रधानमंत्रियों को धर्मस्थलों में जाने में संकोच होता था। मोदी ने सबसे हटकर काम किया है। मोदी के आने से उत्साहित बाबा यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने मोदी से मुखातिब होकर ये भी कहा-आप जो भी कर रहे हैं, उसमें मेरी, आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के सभी साधकों की एक आहूति को साथ में मानकर चलिए। नंबर जब पीएम के बोलने का आया, तो पीएम भी रौं में दिखे। उन्होंने कहा-बाबा रामदेव किन रास्तों पर से होकर उभरकर सामने आए हैं, मैने इसे बेहद करीब से देखा है। संकल्प और संघर्ष की जड़ी बूटी ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है।

दरअसल, 2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद बाबा रामदेव के साथ उनकी बहुत ज्यादा करीबी नहीं दिखाई दी। जिस तरह से यूपीए सरकार के साथ बाबा रामदेव का टकराव था, उसमें ये माना जा रहा था कि मोदी सरकार में बाबा रामदेव की एक अलग भूमिका दिखाई देगी। ऐसा शुरूआत में नहीं हो पाया। इन स्थितियों के बीच, जब केदारनाथ जाकर वहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों के लिए बाबा रामदेव ने हरीश रावत सरकार की पीठ थपथपाई, तो सभी चकराए बगैर नहीं रहे।
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हालांकि बाद में इंटरनेशनल योगा डे पर मोदी-रामदेव की जुगलबंदी के दर्शन हुए और रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलते हुए पूरे देश ने देखा। मोदी ने पतंजलि के कार्यक्रम में आना स्वीकार किया, लेकिन साथ में केदारनाथ के दर्शन भी जुडे़ रहे। इन सबके बावजूद, मोदी-रामदेव के रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार अब माना जा रहा है। पतंजलि से विदा होते वक्त मोदी-रामदेव ने जिस ढंग से एक दूसरे के प्रति सम्मान जताया, वो भी रिश्तों की नई परिभाषा को समझने के लिए काफ ी है।
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