शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हैं। गंगा घाटों पर प्लास्टिक की पन्नी से लेकर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सफाई व्यवस्था की पोल खोलने के लिए गंदगी की तस्वीरें मात्र काफी हैं। फिर भी हरिद्वार नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे पुरस्कार मिल गया? इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोग भी राष्ट्रपति से अवार्ड मिलने की बात पर हैरानी जता रहे हैं।
पिछले कई सालों से हरिद्वार नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ता आ रहा था। वर्ष 2020 में हरिद्वार 244वें और प्रदेश में पांचवें नंबर पर रहा था, जबकि 2021 में देशभर में 285वें और राज्य में पांचवें स्थान पर आया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर की सफाई व्यवस्था कैसे होगी? अब एक साल के अंदर ही अचानक से स्वच्छता सर्वेक्षण में गंगा टाउन श्रेणी में प्रथम स्थान आने पर सवाल उठने लगे हैं।
मंगलवार को राष्ट्रपति पुरस्कार की घोषणा के बाद अमर उजाला ने शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। शहर में कुछ स्थानों को छोड़कर हर जगह कूड़े के अंबार लगे नजर आए। हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट और नाईसोता घाट सहित आसपास के घाटों पर जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे दिखाई दिए।
क्या कहते हैं लोग
शहर की सफाई व्यवस्था में बेहतर तरीके से सुधार करने की जरूरत है। अभी तो समय से कूड़ा नहीं उठता है। दुर्गंध से बुरा हाल रहता है। पुरस्कार मिलना अच्छी बात है लेकिन सफाई व्यवस्था भी तो ठीक होनी चाहिए।
-शिवकुमार, स्थानीय निवासी
जानकारी में आया है कि हरिद्वार को सफाई को लेकर प्रथम स्थान मिला है लेकिन गंगा घाटों के आसपास सफाई व्यवस्था काफी खराब रहती है। सर्वे करने वाली टीम को क्या यह सब नजर नहीं आया।
-गौरव, स्थानीय निवासी
शहर की सफाई व्यवस्था में अभी काफी सुधार होने की जरूरत है। दो-दो कंपनियां काम तो कर रही हैं लेकिन अभी भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं है। हर रोज दोपहर तक कई क्षेत्रों में कूड़े के अंबार लगे रहते हैं। ऐसे में पुरस्कार किस आधार पर दिया जा रहा है।
-संजीव, स्थानीय निवासी
शहर की सफाई व्यवस्था बिलकुल ठीक है। सफाई निरीक्षकों से लेकर सुपरवाइजरों सहित सभी की ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगी थी, इसलिए थोड़ा कूड़ा उठने में समय लग गया होगा।
-दयानंद सरस्वती, नगर आयुक्त हरिद्वार