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यात्री सुरक्षा से खिलवाड़, बिना जांच बसें ढो रही पार्सल

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रोडवेज की बसों में 50 से लेकर 500 रुपये देकर कोई कुछ भी पार्सल भेज सकता है। न तो उसकी जांच होती और ना ही कोई पूछताछ। पार्सल सामान ढोने के रुपये भी चालक-परिचालक की जेब में जाते हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी ताक में रखी जा रही है। यही स्थिति ट्रैवल्स एजेंसी के बसों की भी है।
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हरिद्वार में रोडवेज का बस अड्डा केवल यात्रियों के लिए मुसीबत का अड्डा नहीं है। टैक्स चोरी का भी सबसे बड़ा अड्डा है। नियमों को ताक पर रखकर पार्सल को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है। बस में माल लोड कराने के दौरान कोई पूछताछ और जांच नहीं होती है। पार्सल का टिकट भी नहीं काटा जाता है। बस स्टेशन पर पार्सल छुड़वाने और भेजने के लिए भीड़ रहती है।
कोई ई-रिक्शा तो कोई बाइक-स्कूटी पर पार्सल भेजने या छुड़वाकर ले जाते नजर आता है। चालक और परिचालक थोड़ी से रुपयों के लालच में यात्रियों की जान भी खतरे में डालते हैं। जिस तरह से बिना जांच के पार्सल भेजे जा रहे, ऐसे में कोई भी असामाजिक तत्व कुछ भी सामान रख सकता है और इससे दुर्घटना होने की आशंका भी बनी रहती है।
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बसों में लगेज का सिस्टम नहीं
परिवहन विभाग के नियमानुसार यात्री बसों में लगेज का नियम नहीं है। बसों में केवल यात्रियों का सामान ही रखा जा सकता है। लगेज के लिए ट्रांसपोर्ट परमिट वाहन ही मान्य है।
बिना यात्री के जाने वाला सामान लगेज में बुक होगा।
ये हैं सामान भेजने के नियम
- मौके पर ही सामने पैकेट में पैकिंग होनी चाहिए।
- लगेज की बुकिंग होती है, तरल पदार्थ नहीं जाता है।
- ये सामान कंडक्टर को अपनी वे-बिल में चढ़ाना होगा।
- बस के इंजन के पास कोई भी सामान नहीं रखा जाएगा।
- ज्वलनशील पदार्थ किसी हालत में नहीं जाएगा।
- पैकिंग के बाद रोडवेज अधिकारी अच्छी तरह से जांच करेंगे।
बिना वजन व जांच के पार्सल ले जाना अपराध है। बस अड्डे पर माल के वजन के लिए मशीन भी मौजूद है। रोडवेज के राजस्व को हानि पहुंचाने वाले चालकों-परिचालकों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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- प्रतीक जैन, एआरएम, हरिद्वार डिपो
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