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पौराणिक भीमकुंड की दुर्दशा पर फूटा लोगों को गुस्सा

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एचआरडीए के बाहर पौराणिक भीमकुंड की उपेक्षा को लेकर धरना देते पार्षद कैलाश भट्ट साथ में क्षेत्रव? - फोटो : HARIDWAR
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पौराणिक भीमकुंड की उपेक्षा से नाराज भीमगोड़ा के लोगों का पारा चढ़ गया। लोगों ने पार्षद कैलाश भट्ट के नेतृत्व में लोगोें एचआरडीए कार्यालय पर प्रदर्शन किया और कुंड के जीर्णोद्धार की मांग की। पार्षद ने चेतावनी दी कि यदि भीमकुंड तक गंगा की अविरल धारा पहुंचाने और सौंदर्यकरण का काम नहीं हुआ तो वह मेलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। यदि जरूरी हुआ तो आमरण अनशन भी शुरू किया जाएगा।
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उत्तरी हरिद्वार के भीमगोड़ा के लोगों ने मेला प्रशासन और सिंचाई विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। पार्षद कैलाश भट्ट ने कहा कि मेलाधिकारी दीपक रावत ने भीमकुंड और ब्रिटिशकालीन जल सुरंग का निरीक्षण किया था। उन्होंने उत्तराखंड सिंचाई विभाग को कुंड तक गंगाजल पहुंचाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि कुंभ कार्यों के तहत योजना को स्वीकृति भी मिली। लेकिन अब सिंचाई विभाग काम को लेकर टालमटोल कर रहा है। बलराम गिरी कड़क और शिवम गिरी ने कहा कि पौराणिक भीमकुंड का इतिहास पांडव काल से जुड़ा है। इसके बावजूद शासन प्रशासन कुंड के जीर्णोद्धार को लेकर गंभीर नहीं है। खुशी राम रतूड़ी, नीरज भट्ट, रजत कंडवाल ने कहा कि नेपाल और देश के विभिन्न राज्यों से लोग पिंडदान के लिए भीमकुंड आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आकाश भाटी और नितिन यादव ने कहा कि जब ब्रिटिश काल में सुरंग का निर्माण कर भीमकुंड तक पानी लाया जा सकता है। तो आज कुंड तक जल पहुंचा क्यों संभव नहीं हैं। लोगों ने जल्द से जल्द भीमकुंड के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की मांग की। मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर लोगों की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शन में सुनील कुमार, भरत रुपेश, पवन शर्मा, नरेंद्र कुमार, विरेंद्र गिरी, सुदामा, श्यामदत्त शर्मा, धर्मेंद्र, गोविंद निषाद, करण सिंह राणा, चंद्रशेखर गोस्वामी आदि शामिल रहे।
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