राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग और आयुर्वेद को दुनियाभर में एक नई पहचान देकर इसका महत्व बताया। दोनों ही लोग योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से हेल्थ सेक्टर में क्रांति लाए हैं। भविष्य में विश्व के 7 बिलियन लोग इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद के विद्यार्थी हमारी सभ्यता, संस्कृति के ब्रांड एंबेसडर हैं। योग और आयुर्वेद को विश्व की एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करना है। जिसका उत्तरदायित्व भी स्वामी रामदेव पर ही है।
पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में पहुंचे राज्यपाल ने कहा कि प्राणायाम और योगासनों की शक्तियों को पूरा विश्व पहचान चुका है। आयुर्वेद और योग ने भारत को कोविड काल की चुनौतियों के लिए भी तैयार किया। जहां पूरा विश्व कोविड के कारण बुरी तरह प्रभावित रहा। योग एवं आयुर्वेद के कारण भारत ने इस चुनौती का सामना बेहतर ढंग से किया।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह का अर्थ शिक्षा की समाप्ति नहीं है। शिक्षा तो जीवनभर निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आज पूरा विश्व असीमित संभावनाओं और अवसरों से युक्त है। युवा पीढ़ी से अपेक्षाएं है कि आउट ऑफ द बाक्स थिकिंग और अपनी नई कल्पनाओं के साथ प्रत्येक क्षेत्र में असीमित परिणाम देंगे। योग और आयुर्वेद हमारी सरल, सहज एवं शाश्वत और संपूर्ण चिकित्सा विज्ञान है। जन-जन तक इस बात को पहुंचाना है। हमारे सामने सतत विकास के साथ ही संतुलित विकास की भी चुनौती है। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी यदि उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों में जाकर कार्य करेंगे तो राज्य में रिवर्स माइग्रेशन का नया अध्याय लिखा जा सकेगा।