श्रावण मास की कांवड़ यात्रा शुरू होने में अब केवल दो दिन ही बचे हैं। जिला प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि 10 जुलाई तक यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। 11 जुलाई तक भी कांवड़ मेला क्षेत्र में शिव भक्तों को उपलब्ध कराई जानी वाली जरूरी सुविधाओं को टोटा नजर आया। ऐसे में 14 जुलाई से पहुंचने वाले भोले के भक्तों को दिक्कतें उठानी पड़ सकती हैं।
14 जुलाई से सावन शुरू हो जाएगा। मान्यता है कि सावन शुरू होते ही भगवान शिव अपनी ससुराल कनखल पहुंच जाते हैं। पूरे सावन में वह दक्ष प्रजापति के मंदिर में विराजमान रहते हैं। इसके साथ ही शुरू हो जाएगी कांवड़ यात्रा। खुद शासन और प्रशासन का अनुमान है कि दो साल कांवड़ यात्रा नहीं होने के कारण इस बार चार करोड़ के अधिक कांवडिए गंगाजल लेने के लिए आ सकते हैं।
शासन-प्रशासन इसी इस हिसाब से कांवड़ यात्रा की तैयारियां करने का दावा कर रहा है। लेकिन धरातल पर हालत दावों के ठीक उलट हैं। अमर उजाला ने सोमवार को कांवड़ यात्रा व्यवस्थाओं की पड़ताल कि तो तैयारियां अब भी आधी अधूरी नजर आ रही हैं। रोड़ी बेलवाला, पंतदीप, बैरागी कैंप में शौचालय निर्माण के साथ ही लाइट और पेयजल जैसी बुनियादी व्यवस्था अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। पंतदीप और चमगादड़ टापू में लगने वाला कांवड़ मेला बाजार की तैयारी शुरू ही नहीं हुई।
कांवड़ियों के लिए रोड़ी बेलवाला, पंतदीप, चमगादड़ टापू और बैरागी कैंप क्षेत्र में व्यवस्थाएं की जाती हैं। अस्थायी शौचालयों के साथ ही पेयजल, बिजली और जगह-जगह ठहरने के लिए टिनशेड लगाए जाते हैं। लेकिन अब तक भी शौचालय के साथ ही पेयजल, लाइटों की तैयारी पूरी नहीं की जा सकी है।
रोड़ी बेलवाला में पार्किंग के लिए टिनशेड लगा दिए गए। लेकिन, शौचालय बनाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ। टेंडर में देरी होने से चमगादड़ टापू में कांवड़ मेला बाजार तक नहीं लग पाया। बैरागी कैंप में भी बाजार बनाने की तैयारी तक शुरू नहीं हुई। कांवड़ पटरी मार्ग पर शंकराचार्य चौक से लेकर सिंहद्वार तक टिनशेड की अस्थायी दीवार बनाने का काम पूरा नहीं हो सका है। जबकि लालपुल से लेकर जटवाड़ा पुल तक भी यही स्थिति है।
रोड़ीबेलवाला मैदान : सुबह 10:30 बजे
रोड़ीबेलवाला मैदान में दुपहिया वाहन की पार्किंग बनानी है। इसके लिए टिननशेड तो लगा दिए लेकिन इससे आगे खाली जगह पर सफाई सही ढंग से नहीं हुई। मैदान में बारिश का पानी भरा था। पास में ही जेसीबी से मिट्टी डालकर गड्ढों को भरा जा रहा था।
हरकी पैड़ी : सुबह 11: 00 बजे
हरकी पैड़ी और मालवीय घाट और संजय पुल के पास भीड़ नियंत्रण के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। हालांकि, संजय पुल और हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के समीप और मालवीय घाट के आसपास बैरियर जरूर रख दिए हैं।
पंतदीप मैदान : सुबह 11:20 बजे
पंतदीप मैदान और चमगादड़ टापू पर लगने वाले कांवड़ बाजार के स्थान पर ढाबे, खोखे और गौशाला बनी हैं। यहां साफ सफाई न होने के साथ ही बारिश के पानी की निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में जब लाखों कांवडिए पहुंचेंगे तो उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
कांवड़ पटरी : सुबह 12:00 बजे
शंकराचार्य चौक से लेकर ऋषिकुल तक कांवड़ पटरी और हाईवे समांतर में हैं। कांवड़ियों को पटरी से ही वापसी कराई जाती है। कांवड़िए पटरी से हाईवे पर न उतरें इसके लिए टिन और बल्ली लगाकर दीवार बनाई जाती है। प्रेमनगर आश्रम से लेकर सिंहद्वार तक बीचबीच में नहर किनारे और हाईवे की तरफ टीन की दीवार बनाई गई। शंकराचार्य चौक से ऋषिकुल तक टिन की दीवार बनाने के लिए केवल लकड़ी की बल्लियां ही लगाई गई हैं। पटरी पर पेयजल के लिए स्टैंड पोस्ट नहीं लगे दिखे। पटरी पर बने करीब चार प्याऊ में टोंटियां तक नहीं लगी थी।
पुलों पर सुरक्षा : दोपहर 12:15 बजे
पुलों से कांवड़िए को ध्यान गंगनहर की तरफ जाए और छलांग न लगा सकें इसके लिए पुलों पर बैरिकेडिंग कर पर्दे लगाए गए हैं। प्रेमनगर पुल, ऋषिकुल और सिंहद्वार पर ये व्यवस्था की गई है। जबकि मायापुर और ओमपुल के पास कोई इंतजाम नहीं किया गया है।