इस बार आषाढ़ पूर्णिमा 21 जुलाई को पड़ी, जिसके चलते अगले ही दिन यानी 22 जुलाई से सावन की शुरुआत हो गई। सावन माह का समापन 19 अगस्त को होगा और सोमवार से शुरू होकर सोमवार के दिन ही सावन माह का समापन होगा।
कांवड़ यात्रा को हर साल उत्सव की तरह देखा जाता है। जब सड़कों पर कांवड़ियों का जत्था निकलता है तो हर तरफ शिव भगवान के ही जयकारे लगते सुनाई देते हैं। ऐसे में हर तरफ उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है। हालांकि इस बार पंचक में कांवड़ यात्रा पड़ी है। ऐसे में कम लोग कांवड़ उठाएंगे, जिसका असर कांवड़ यात्रा पर भी पड़ेगा।
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28 जुलाई से कांवड़ यात्रा फिर से जोर पकड़ेगी। माना जा रहा है कि पंचक के बाद भीड़ इस कदर बढ़ सकती है कि बीते कई सालों को रिकॉर्ड भी टूटेगा। पंचक में कांवड़ न उठाने वाले लोग एक साथ जुटेंगे। सही मायने मे कावड़ यात्रा का विशाल रूप 28 जुलाई से दिखेगा।
इस बार आषाढ़ पूर्णिमा 21 जुलाई को पड़ी, जिसके चलते अगले ही दिन यानी 22 जुलाई से सावन की शुरुआत हो गई। सावन माह का समापन 19 अगस्त को होगा और सोमवार से शुरू होकर सोमवार के दिन ही सावन माह का समापन होगा। इस बार सावन माह में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। यह भी एक विशेष संयोग है। दो अगस्त को शिवरात्रि का जल चढ़ेगा। सावन शिवरात्रि पर ही कांवड़ यात्रा का जल चढ़ता है। सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दो अगस्त को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी। वहीं, अगले दिन यानी तीन अगस्त को दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में सावन शिवरात्रि व्रत दो अगस्त शुक्रवार को पड़ेगा।
आचार्य विकास जोशी के अनुसार पंचक में कांवड़ यात्रा पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंचम में बांस की खरीदारी नहीं करनी चहिए। चूंकि कांवड़ बांस से बनाई जाती है, ऐसे में कांवड़ यात्रियों को 28 जुलाई तक पंचक समापन का इंतजार करना होगा।