फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओएसटी सेंटर, दवा न डाक्टर, करते भी नहीं रेफर

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला क्षय रोग अस्पताल परिसर में बना ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर (ओएसटी) भगवान भरोसे हो गया है। सेंटर में डॉक्टर ही नहीं, अब दवाओं का संकट भी खड़ा हो गया है। सेंटर में सिरिंज से नशा लेने वालों की काउंसिलिंग और इलाज होता है। यहां से करीब 150 लोगों की नियमित दवाएं चलती हैं। दवाएं नहीं मिलने से इलाज करवाने वाले परेशान हैं। वो सेंटर से दूसरे अस्पताल रेफर करने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन रेफर भी नहीं किया जा रहा है। इलाज नहीं मिलने से कई लोग फिर से नशे के इंजेक्शन लेने लगे हैं।
विज्ञापन

ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर में सिरिंज से नशा लेने वालों का इलाज चलता है। प्रदेश में हरिद्वार, देहरादून और हल्द्वानी समेत कुल छह सेंटर चलते हैं। हरिद्वार सेंटर में सालों से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। क्षय रोग अधिकारी को ही सेंटर के नोडल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जाता है। क्षय रोग अधिकारी टीबी अस्पताल की ओपीडी में ओएसटी सेंटर के मरीजों की काउंसिलिंग कर दवाएं शुरू करवाते हैं। सेंटर में 150 लोगों का नियमित इलाज चलता है। इसमें नशा छुड़वाने के लिए गोलियां खिलाई जाती हैं। गोली खाने वालों को हर रोज सेंटर पहुंचकर हाजिरी लगानी पड़ती है। काउंसिलर अपने सामने ही गोली खिलाते हैं।
सेंटर में बीते 15 दिन से दवाएं खत्म हैं। इसकी वजह बजट की कमी बताई जा रही है। दवा नहीं मिलने से इलाज करवाने वाले भटक रहे हैं। सेंटर के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनको मायूस लौटना पड़ रहा है। दवाएं नहीं होने से नोडल अधिकारी भी नए रोगियों की काउंसिलिंग नहीं कर पा रहे हैं। सेंटर की ओपीडी में रोजाना कई नए रोगी भी पहुंच रहे हैं। जिन लोगों का इलाज चल रहा है वो दूसरे अस्पतालों को रेफर करने की गुहार लगा रहे हैं। उनको रेफर भी नहीं किया जा रहा है। सेंटर में खत्म होने वाली दवा बाजार में नहीं मिलती है। दवा से संबंधित साल्ट से मिलती-जुलती दवाएं मेडिकल स्टोर संचालक बिना मनोचिकित्सक की सलाह के नहीं देते हैं। दवाओं के संकट के चलते इलाज नहीं मिलने से कई लोगों ने फिर से नशे के इंजेक्शन लेने शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन

मैंने कुछ दिन पूर्व ही ओएसटी सेंटर का चार्ज लिया है। सेंटर में दवाएं नहीं हैं। दवाओं के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। एक सप्ताह में दवाएं आने की उम्मीद है। दवा के बिना नहीं रह पाने वालों को मेला अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक के पास भेजा जाता है। वहां उनकी काउंसिलिंग की जाती है। - डॉ. आरके सिंह, नोडल अधिकारी, ओएसटी सेंटर
ओएसटी सेंटर के लिए अलग से चिकित्सक की तैनाती कभी नहीं हुई। जिला क्षय रोग अधिकारी के पास ही सेंटर के नोडल का कार्यभार होता है। सेंटर में आने वाले हर मरीज की पहले काउंसिलिंग होती है। उसके बाद ही दवा की डोज का चार्ट तैयार होता है। सेंटर में दवाएं नहीं हैं। - डा. सादाब सिद्दिकी, पूर्व नोडल अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें