हरिद्वार। सरकारी एजेंसियां ने प्रदेश की विकास की प्रगति को सबसे तेज बताते हुए राज्य की सराहना की है लेकिन हरिद्वार में कुछ पहलुओं पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। अभी तक जिले में विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई जिला विकास समिति का ही गठन नहीं हो सका है। इस कारण जिला पंचायत और नगर निकायों समेत विभिन्न विभागों के करोड़ों रुपये के प्रस्ताव लटक गए हैं। जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी प्रस्ताव बनाकर भेज रहे है लेकिन समिति नहीं बनने से न तो जिला योजना की बैठक हो सकी और न ही विकास की योजनाएं बन पाई। ऐसे में विकास की बाट जोह रहे क्षेत्र और उनके जनप्रतिनिधि समिति के गठन को लेकर शासन और प्रशासन की तरफ देख रहे है।
चालू वित्तीय योजना का पांचवां महीना चल रहा है। सामान्यतया अप्रैल में ही जिला योजना समिति का गठन हो जाना चाहिए। जिले की प्रभारी मंत्री इस समिति के अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी दिए जाने वाले प्रस्तावों को मंजूरी देकर विकास कार्य कराए जाते हैं। अप्रैल महीने में हरिद्वार में इस बार जिला पंचायत का कोई अध्यक्ष नहीं था, क्योंकि चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी। मई के पहले सप्ताह में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हो जाने के बाद उम्मीद थी कि समिति की गठन इस महीने के अंत तक करा लिया जाएगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इंतजार करते हुए जून, उसके बाद जुलाई और अब अगस्त भी लगभग आधा बीत चुका है। समिति का गठन ही नहीं हो सका। ऐसे में विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है।
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ऐसा होता है स्वरूप
जिला योजना समिति में जिला पंचायत के सदस्यों के अलावा सभी विधायक, हरिद्वार, रुड़की नगर निगम, मंगलौर नगर पालिका के सदस्य और लक्सर, लंढौरा और झबरेड़ा नगर पंचायतों से एक सदस्य चयनित होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में हरिद्वार जिले की जिला योजना का बजट 52 करोड़ रुपये का था। इस बार इसके और भी ज्यादा होने की उम्मीद थी इससे पूरे जिले में सड़क, पुलिया, खड़ंजे, हैंडपंप आदि के काम कराए जाते हैं।
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ये लटकें हैं प्रमुख कार्य
- पेयजल निगम की ओर से लगाए जाने वाले 500 हैंडपंप नही लग पा रहे हैं, जिले के सभी 11 विधानसभा क्षेत्रों में गलियों और सड़कों के करीब 20 करोड़ रुपये के प्रस्ताव लंबित पडे़ हैं।
-- जिला पंचायत सदस्यों के क्षेत्रों में लगने वाले हैंडपंप लगवाने, सड़क आदि के काम भी नहीं हो रहा है।
- वर्ष 2013 में आई आपदा में भी टूटी एक दर्जन से भी ज्यादा पुलिया भी अभी तक मरम्मत का इंतजार कर रही है।
लोक निर्माण विभाग, जल संस्थान, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के भी अनेक काम भी रुके पड़े हैं।
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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
राज्य सरकार की इससे बड़ी विफलता और हरिद्वार की उपेक्षा और कोई नहीं हो सकती कि एक तिहाई से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जिला योजना का गठन नहीं किया गया। सरकार जानबूझकर इसका गठन नहीं कर रही है। मेरे क्षेत्र में ही दर्जनों सड़कें और गलियों का निर्माण होना है लेकिन बैठक हो तो विकास को कुछ गति मिले। सरकार नहीं चाहती कि हरिद्वार में विकास हो।
-मदन कौशिक विधायक, हरिद्वार नगर
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जिला योजना हो या विकास की कोई भी अन्य एजेंसी राज्य सरकार को रवैया उपेक्षा पूर्ण ही रहता है। इस सरकार से विकास की उम्मीद ही करनी बेमानी है।
- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक हरिद्वार ग्रामीण
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जिला योजना के गठन के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है शीघ्र ही गठन हो जाएगा।
- सोनिका, मुख्य विकास अधिकारी