सिडकुल के उद्योगों में कार्यरत कर्मचारी नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हाल ये है कि महीने का पहला हफ्ता बैंकों और एटीएम की लाइन में लगे गुजर गया है और पूरी तनख्वाह हाथ में नहीं आ पाई है। वहीं मंदी की मार पड़ने से फैक्ट्रियों में उनकी छंटनी की तलवार भी लटक गई है। कुछ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन के लिए ब्रेक भी दे दिया है।
एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने के एक महीने बाद भी हर वर्ग बेहाल है। औद्योगिक क्षेत्र में करीब सैकड़ों छोटी बड़ी फैक्ट्रियां हैं। जिनमें यूपी उत्तराखंड सहित अलग अलग राज्यों के लगभग 1.25 लाख कर्मचारी काम करते हैं। अधिकांश कर्मचारी ठेके पर अस्थायी काम करते हैं। कर्मचारियों का एक बड़ा तबका ऐसा भी है, जिसे अभी तक नगद मजदूरी दी जाती रही है। नोटबंदी ने पूरा गणित ही बिगाड़ दिया है। नए नोटों की किल्लत होने पर नवंबर महीने की तनख्वाह भी ज्यादातर कर्मचारियों को पुराने नोट के रूप में दी गई। जिसे उन्होंने लाइनों में लगकर जमा कराया। वहीं जिन कर्मचारियों की तनख्वाह पहले से ही बैंक खातों में आती है, हफ्ता बीतने पर भी उनका पूरा मेहनताना हाथ में नहीं आ पाया है। कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो छुट्टी लेकर लाइन में लगने को मजबूर हैं तो कुछ कर्मचारी रात में ड्यूटी कर सुबह होते ही लाइन में लगने के लिए पहुंच जा रहे हैं।
वहीं कर्मचारियों की धड़कने छंटनी की संभावना से भी बढ़ रही हैं। डिमांड घटने से कंपनियों ने उत्पादन भी कम कर दिया है। जिस कारण कर्मचारियों की जरूरत कम है। ऐसे में कुछ कंपनियों ने आगे काम देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
व्यापार में नहीं आया उछाल
पूरे एक माह बाद भी बाजार की कमर टूटी ही हुई है। व्यापारी वर्ग अब भी त्रस्त ही है। हर तरफ मंदा छाया हुआ है। व्यापार में उछाल न आने से व्यापारी वर्ग बेहद ही चिंतित है।
नए नोट से कुछ राहत मिली है लेकिन पूरी तरह से व्यापार फिर से खड़ा नहीं हो सका है। कृष्णानगर कालोनी में सलेक्शन बेकर्स के स्वामी रजत गंभीर की माने तो नए नोट से कुछ काम हो रहा। लेकिन अभी पहले जैसी बात नहीं है। अब भी उधार देना पड़ रहा है। महाकाली एंटरप्राइजेज के मालिक योगेश वाधवा ने बताया कि मोबाइल फोन की बिक्री में बेहद ही कमी आई है। हालांकि वे कार्ड से भी पेमेंट ले रहे हैं लेकिन फिर भी कम ही ग्राहक आ रहे हैं। व्यापारी नेता सुनील सेठी ने बताया कि व्यापारी परेशान हैं। वह अपनी शिकायत करे तो किससे करें। कनखल में बांगा कलेक्शन के स्वामी अनुज बांगा बोलते है कि इस बार शादी का सीजन नोटबंदी की भेंट चढ़ गया।
बैंकों के नहीं सुधरे हालात
500 एवं 1000 नोट बंद किए जाने पर पूरे 30 दिन हो गए, लेकिन न बैंकों के हालात सुधरे और न एटीएम के। जनपद में सभी बैंकों की शाखा 257 और उनके 337 एटीएम है। शहर से लेकर ग्रामीण तक कोई ऐसा एटीएम नहीं रहा जिनमें नियमानुसार 24 घंटे की लगातार सेवा दी हो। नोटबंदी के बाद एक सप्ताह तक 50 प्रतिशत बैंकों ने जैसे तैसे काम किया, लेकिन उसके बाद स्थिति बिगड़ गई। प्रथम खेप में नए नोट 2000 रुपये के कुल 100 करोड़ रुपये मिले, जो दो दिन में ही बंट गए। इसके बाद अगले सप्ताह 80 करोड़ आए और बैंकों में हाथोंहाथ बंट गए। दो सप्ताह के बाद एसबीआई, पीएनबी जैसे बैंक कंगाल हो गए, जबकि निजी बैंकों में ताला लगने की स्थिति हो गई। ग्रामीण एवं कस्बों के एटीएम तो एक दिन भी नहीं चल सके, तो शहर के अधिकांश एटीएम में एक दिन भी कैश भरपूर नहीं रहा।
नहीं मिला कैश, निराश लौटे लोग
बृहस्पतिवार को शहर के किसी भी बैंक में कैश उपलब्ध नहीं रहा। इससे किसी भी व्यक्ति को रोकड़ा नहीं मिला, जबकि लोग सुबह से ही बैंक खुलने के इंतजार में लाइन में लगे रहे। जब बैंक खुले तो कैश न होने पर लोग मायूस होकर लौटे। टिहरी विस्थापित की पीएनबी ब्रांच में लोगों ने हंगामा काटा। एसपी बौठियाल, प्रवीण, जगपाल, श्रीनाथ यादव, नेपाल, सूरत चौधरी, सोमपाल, भीम सिंह आदि ने कहा कि गार्ड कैश उपलब्ध होने की बात कहता रहा, लेकिन स्टाफ ने नो कैश बता दिया।