गांव में सदाराम ही था नाम, दस्तावेजों में भी दर्ज : रावत
अल्मोड़ा निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने बताया कि परिवार रजिस्टर की नकल और स्कूल के दस्तावेजों में भी सुरेंद्र का नाम सदाराम ही दर्ज है। सुरेंद्र ने अपने काफी दस्तावेज और केस से जुड़े तमाम दस्तावेज भी उन्हें दिए थे। उन्हें इसलिए भी इस बारे में पूरी जानकारी है। शुरुआत में इसी नाम से सभी जानते भी थे।
बताया कि प्रदेश जाने के बाद उसने अपना नाम सुरेंद्र रख लिया था। पहचान पत्र, आधार कार्ड में भी उसका नाम फिर यही दर्ज हो गया था। रिहाई के बाद सुरेंद्र अपने आधार कार्ड में पुराना नाम दर्ज कराना चाहते थे लेकिन इतनी जटिलताएं हैं कि वह ये नहीं करा सके।सुरेंद्र के भाई ने पुलिस को दी तहरीरसुरेंद्र के भाई चंदन ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही सप्तऋषि चौकी प्रभारी के नाम एक तहरीर दी है। तहरीर में बताया कि 19 सितंबर को घटना की जानकारी मिलने के बाद वह हरिद्वार पहुंचे। जिला अस्पताल की मोर्चरी में जब सुरेंद्र के शव को देखा तो मुंह और नाक से खून बह रहा था। गले में रस्सी बंधी हुई थी। शव को देखकर नहीं लगता है कि ये आत्महत्या है। इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति सामने आ पाएगी। प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का ही लग रहा है। फिलहाल जांच चल रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी चेक किए जा रहे हैं। - शिशुपाल सिंह नेगी, सीओ सिटी, हरिद्वार