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सुरेंद्र कोली: निठारी कांड के बाद अपनी पुरानी पहचान में लौटना चाहता था, परिवार रजिस्टार और स्कूल में था ये नाम

Mon, 21 Sep 2026 12:28 PM IST
Renu Saklani आवेश अंसारी, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

निठारी कांड से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली अपनी पुरानी पहचान की ओर लौटना चाहता था। गांव के दस्तावेजों से सामने आया है कि शहर जाने से पहले उसकी पहचान सदाराम के नाम से थी।
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सुरेंद्र कोली - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भूपतवाला में चाय के खोखे में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी सुरेंद्र कोली की शुरुआत में गांव में पहचान सदाराम के नाम से होने की बात सामने आई है। परिवार रजिस्टर और स्कूल के दस्तावेजों में भी सदाराम नाम दर्ज होने का दावा किया गया है।

परिवार की मददगार रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि गांव से शहर जाने के बाद उसने अपना नाम सुरेंद्र कोली रख लिया था। अब इस कांड में बरी होने के बाद रिहा होकर आधार कार्ड में भी अपना पुराना नाम दर्ज कराने का प्रयास कर रहे थे लेकिन दस्तावेजी जटिलताओं के चलते ऐसा नहीं हो सका।

दो पहचान पत्र सामने आए

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18 सितंबर को सप्तसरोवर मार्ग स्थित वैष्णो देवी मंदिर के सामने चाय के खोखे में सुरेंद्र कोली संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। उनके गले में रस्सी का फंदा कसा हुआ था, जबकि रस्सी का आधा टूटा हिस्सा पंखे से लटका मिला था। पुलिस को उनके बैग से दो पहचान पत्र मिले थे।

इनमें एक आधार कार्ड पर सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर, निवासी सेक्टर-32, नोएडा, गौतमबुद्धनगर दर्ज था, जबकि पुराने पहचान पत्र पर सदाराम पुत्र शंकर निवासी ग्राम मंगरूखाल रुडोली अल्मोड़ा लिखा था। यह पहचान पत्र वर्ष 2003 का बताया गया था। दो पहचान पत्र सामने आने के बाद अपनी पुरानी पहचान छिपाकर हरिद्वार में रहने की बात सामने आई थी।

पुलिस ने इस मामले में प्रथमदृष्टया आत्महत्या मानते हुए जांच शुरू की थी, जबकि शनिवार को हरिद्वार पहुंचे परिजनों ने आत्महत्या की बात से इन्कार करते हुए हत्या की आशंका जताई थी। फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। वीडियोग्राफी के बीच पैनल से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। परिजनों ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया और इसके बाद वापस लौट गए। 

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गांव में सदाराम ही था नाम, दस्तावेजों में भी दर्ज : रावत

अल्मोड़ा निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने बताया कि परिवार रजिस्टर की नकल और स्कूल के दस्तावेजों में भी सुरेंद्र का नाम सदाराम ही दर्ज है। सुरेंद्र ने अपने काफी दस्तावेज और केस से जुड़े तमाम दस्तावेज भी उन्हें दिए थे। उन्हें इसलिए भी इस बारे में पूरी जानकारी है। शुरुआत में इसी नाम से सभी जानते भी थे।

बताया कि प्रदेश जाने के बाद उसने अपना नाम सुरेंद्र रख लिया था। पहचान पत्र, आधार कार्ड में भी उसका नाम फिर यही दर्ज हो गया था। रिहाई के बाद सुरेंद्र अपने आधार कार्ड में पुराना नाम दर्ज कराना चाहते थे लेकिन इतनी जटिलताएं हैं कि वह ये नहीं करा सके।सुरेंद्र के भाई ने पुलिस को दी तहरीरसुरेंद्र के भाई चंदन ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही सप्तऋषि चौकी प्रभारी के नाम एक तहरीर दी है। तहरीर में बताया कि 19 सितंबर को घटना की जानकारी मिलने के बाद वह हरिद्वार पहुंचे। जिला अस्पताल की मोर्चरी में जब सुरेंद्र के शव को देखा तो मुंह और नाक से खून बह रहा था। गले में रस्सी बंधी हुई थी। शव को देखकर नहीं लगता है कि ये आत्महत्या है। इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जाए।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति सामने आ पाएगी। प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का ही लग रहा है। फिलहाल जांच चल रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी चेक किए जा रहे हैं। - शिशुपाल सिंह नेगी, सीओ सिटी, हरिद्वार
 
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