उत्तराखंड के लोकप्रिय लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी की गीतों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। नेगी ने एक एक कर कई शानदार प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। उनकी बहुचर्चित प्रस्तुति नौ छमी नारैणा की मांग भी श्रोताओं ने जोर शोर से उठाई, लेकिन उन्होंने इस प्रस्तुति के लिए समुचित मंच न बताते हुए राजनीति से प्रेरित कोई भी प्रस्तुति नहीं दी।
गंगा महोत्सव के तीसरे दिन ऋषिकुल पंडाल में लोकप्रिय लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी आदि की प्रस्तुति रही। जैसे ही नरेन्द्र सिंह नेगी मंच पर पहुंचे, उन्हें सुनने के लिए शाम से ही पंडाल में मौजूद उनके हजारों प्रशंसक तालियां बजाते हुए खड़े हो गए। नरेन्द्र सिंह नेगी ने भगवान त्रिजुगी नारायण को समर्पित हिमवंत देश होला, त्रिजुगी नारायण और मां नंदा देवी को समर्पित अपनी लोकप्रिय प्रस्तुति पैरा पैरा गोरा के साथ अपने संगीतमय सफर को आगे बढ़ाया।
इसके बाद उन्होंने मां गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि मां गंगा की स्वच्छता के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। उनकी प्रस्तुति गंदूलु की रैपाली छारु पाणु गंगा जी सहित कई अन्य प्रस्तुतियों को भी खूब सराहा गया। नरेन्द्र सिंह नेगी के साथ सहयोगी कलाकारा अनिल बिष्ट, गणेश गुगसाल गणी, उषा नेगी, प्रमेन्द्र नेगी, अंजली, राजेश्वरी आदि ने भी शानदार प्रस्तुतियों में सहयोग दिया। हरिद्वार नागरिक मंच के अध्यक्ष सतीश जैन, उपाध्यक्ष पीएस चौहान, महामंत्री देवेन्द्र शर्मा, सुनील कुमार बत्रा आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।
लोक संस्कृति के सरंक्षण में सरकार के प्रयास सराहनीय
लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य में भाषाओं और लोक संस्कृति को सरंक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि काफी पहले से उन सहित अन्य कलाकार सरकारों से इस बारे में कदम उठाने की मांग कर रहे थे। अब काफी समय बाद कुछ प्रयास होते दिख रहे हैं। जिससे राज्य की संस्कृतियों का सरंक्षण हो सकेगा। उन्होंने लोकभाषाओं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की हिमायत की। लंबे समय से नया एल्बम नहीं आने के सवाल पर नेगी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा का मौजूदा दौर लोक गायकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। इस समय सीडी और कैसेट बिकने बंद हो गए हैं। जिससे म्युजिकल कंपनियों ने नए एल्बम बनाने बंद कर दिए हैं। ऑनलाइन म्यूजिक आने से इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है। मोबाइल और पैन ड्राइव के युग में सीडी और कैसेट का वजूद ही समाप्त हो गया है।