भोलागिरि रोड स्थित करोड़ों की सरकारी नजूल भूखंड संख्या 50 की संपत्ति को अवैध रूप से खुर्द-बुर्द कर ठिकाने लगाने का पर्दाफाश हुआ है।
अभिलेखों की जांच में पाया गया कि अक्तूबर 1936 में इस नजूल भूखंड का पट्टा फकीर चंद के नाम 30-30 वर्ष के अंतराल में नवीनीकरण के प्रावधान के साथ 90 वर्ष के लिए किया गया था। नजूल के इस भूखंड पर वर्तमान में करणी भवन धर्मशाला है। जिसमें यात्रियों के निवास के लिए 70 कमरे, 6 बड़ी-बड़ी दुकानें और दो रेस्टोरेंट हैं। शहर के बीच में 3600 वर्ग फीट में फैली यह संपत्ति करोड़ों की है। जांच में साबित हुआ कि इस संपत्ति को ठिकाने लगाने में तत्कालीन नगरपालिका तथा वर्तमान में नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल रहे हैं। जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने प्रकरण में सचिव हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की जांच आख्या सचिव शहरी विकास को भेजते हुए आगे की कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश देने का अनुरोध किया। महेंद्र सिंह चावला की द्वितीय अपील पर सूचना आयोग ने नजूल संपत्ति की जांच कराने का आदेश 22 मार्च 2016 को पारित किया था। जिस पर सचिव शहरी विकास ने मई में जिलाधिकारी को जांच कराकर आख्या मांगी थी।
जिलाधिकारी ने सचिव हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को जांच अधिकारी नामित किया था। सचिव अरविंद कुमार पांडेय ने लीज पट्टाधारक की मृत्यु के उपरांत लीजधारक के वारिसों ने लीजडीड में अपना नाम दर्ज कराए बिना 8 नवंबर 1960 को लीजडीड बजरिये रजिस्ट्री चैरिटी ट्रस्ट को हस्तांतरित किया। जबकि उनके नाम संपत्ति थी ही नहीं। तत्कालीन नगरपालिका बोर्ड प्रस्ताव संख्या 607 के माध्यम से 23 मार्च 1961 को ट्रस्ट के पक्ष में नाम परिवर्तन किया गया।जांच अधिकारी ने पाया कि तत्कालीन नगरपालिका समिति एवं वर्तमान में नगर निगम नजूल संपत्ति का मात्र प्रबंधक था। इसलिए उसने जिलाधिकारी की स्वीकृति प्राप्त किए बिना जो नवीनीकरण किया वह अवैधानिक थी।
15 साल का किराया 225 रुपये
3600 वर्ग फीट के नजूल भूखंड पर विद्यमान संपत्ति का 15 साल का लीज रेंट 225 रुपये मृतक फकीर चंद के नाम से नगर निगम ने 10 अप्रैल 2013 को जमा किया है। संपत्ति की जांच शुरू होने के बाद नगर निगम बोर्ड ने 13 जुलाई 2016 को प्रस्ताव संख्या 25 के माध्यम से नजूल प्लाट संख्या 50 की लीज को नवीनीकरण करने के लिए जिलाधिकारी भेजा था, लेकिन जिलाधिकारी ने इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। शिकायतकर्ता महेंद्र सिंह चावला का कहना है कि नगरपालिका व नगर निगम ने लीजडीड में अवैध रूप से नाम परिर्वतन किया और फिर मृत व्यक्ति के नाम से 15 साल का लीज रेंट जमा कर धोखाधड़ी की है। बताया कि करोड़ों की नजूल संपत्ति को ठिकाने लगाने में शामिल लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।
प्रकरण की जानकारी लेंगे
नगर आयुक्त अशोक पांडेय का कहना है कि यह पुराना प्रकरण है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। जानकारी लेकर ही कुछ कहा जा सकता है। वैसे भी जब शासन ने जांच करा ली है तो उस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है।