श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के जनरल सचिव महंत गणेश दास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से अपना निष्कासन समाप्त करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी और राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें 2016 प्रयागराज कुंभ में हुए निष्कासन को गलत बताया गया।
महंत गणेश दास ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पदाधिकारियों ने उन्हें गुमराह कर निष्कासित कराया था। इस निष्कासन के कारण उनके देवताओं का कुंभ मेला के शाही स्नानों में लगातार अपमान होता रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पदाधिकारी नया अखाड़ा उदासीन की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर उसे बेच रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने अखाड़ा परिषद को इन आरोपों के प्रमाण भी दिए हैं।
महंत गणेश दास ने बताया कि नए अखाड़ा की व्यवस्थाओं के लिए पंजाब के जालंधर जिले में एक जनरल कमेटी पंजीकृत है। यह कमेटी भ्रमणशील जमात मंडल के मुखिया महंतों के कार्यकलापों पर नियंत्रण रखती है। निष्कासन के बाद से इन पदाधिकारियों ने कमेटी की बैठकों में आना बंद कर दिया है। वे कमेटी के चुनाव भी नहीं करवा रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार चुनाव और पंजीकरण का नवीनीकरण आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने 2016 प्रयागराज कुंभ में हुए निष्कासन को रद्द करने की मांग के साथ ही कई अन्य बिंदुओं को भी उठाया। उनका कहना है कि तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को गुमराह कर यह कार्रवाई की गई थी।
अखाड़ा परिषद का आश्वासन
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी और महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से छानबीन की जाएगी। तथ्यों का पता लगाकर नियमानुसार सांविधानिक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी। इसके लिए एजेंडा जारी कर अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में सभी तथ्यों पर विचार कर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।