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मातृसदन फिर उतरा खनन के विरोध में

Sat, 28 Nov 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। गंगा में अवैध खनन के विरोध में मातृसदन ने फिर से सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने शनिवार से आश्रम परिसर में तपस्या शुरू की। परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने कहा कि शासन-प्रशासन और नेताओं के गठजोड़ की वजह से क्षेत्र में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मातृसदन पहले अपने दो ब्रह्मचारियों का बलिदान गंगा की रक्षा के लिए कर चुका है आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
गंगा में खनन पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के लिए मातृसदन लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। पिछले दिनों भी स्वामी शिवानंद ने अवैध खनन बंद न होने पर तपस्या (अनशन) करने की चेतावनी दी थी। लेेकिन उस दौरान डीएम से हुई वार्ता के बाद खनन पर रोक लगा देने के कारण तपस्या टाल दी गई थी। शनिवार को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद खनन के विरोध में मातृसदन परिसर में अनिश्चितकालीन तपस्या पर बैठ गए। इस दौरान पत्रकारों से वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि शासन-प्रशासन, नेताओं और माफिया के गठजोड़ के चलते क्षेत्र में अवैध खनन कराया जा रहा है। जो पट्टे पहले निरस्त बताए गए हैं उनमें भी खनन जारी है। उन्होंने बताया कि मातृसदन पर दबाव बनाने के लिए न्यायालय को भी गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृसदन गंगा रक्षा के अपने संकल्प के अनुरूप संघर्ष करता रहेगा। इससे पहले दो ब्रह्मचारी अपना बलिदान गंगारक्षा के लिए दे चुके हैं। उन्होंने खनन पर तत्काल रोक लगाने, अवैध खनन कर लाई जा रही खनन सामग्री खरीदने वाले स्टोन क्रशरों को सीज करने की मांग उठाई।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने हरिद्वार के पंडा समाज, संतों-महंतों और जनमानस को गंगा की दुर्दशा के लिए भी जिम्मेदार ठहराया। कहा कि एक बार भी कोई दमदार आवाज गंगा की रक्षा के लिए नहीं उठी। हर कोई केवल हरकी पैड़ी पर गंगा चाहता है। इसकी दुर्दशा से किसी को कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने खनन को लेकर वनमंत्री दिनेश अग्रवाल पर भी दोबारा हमला बोला।
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