हरिद्वार। द्वारिका एवं ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने गुरू पूर्णिमा पर पूजा अर्चना कर राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की मनोकामना की। वाराणसी से आए विद्वानों ने चारों वेदों के मंत्रोचारण के साथ पूजन कराया।
मंगलवार को कनखल स्थित मठ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद की ओर से पूजन कार्यक्रम किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सीखने और सिखाने की परंपरा न हो तो ज्ञान एक ही जगह पर ठिठक जाएगा। यही वजह है कि जीवन में गुरु की महत्ता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं की विशेष आराधना की जाती है। शस्त्र सम्मत माना जाता है कि अषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ है। उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। वेदव्यास को आदि गुरु माना जाता है। वे ही वेदों के प्रथम व्याख्याता थे, गुरु पूर्णिमा पर उनकी पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार महर्षि वेद व्यास भगवान विष्णु के अवतार थे। इस मौके पर दंडी स्वामी अमृतानंद महाराज, स्वामी गोविंदानंद, सचिव सुबोधानंद महाराज, स्वामी रामानंदा ब्रहमचारी, रविशंकर शास्त्री, राजेंद्र शास्त्री, कर्नाटक चीफ जस्टिस सुब्रो कमल मुखर्जी आदि गणमान्य शामिल हुए। शंकराचार्य का चातुर्मास भी शुरू हो गया।