हरिद्वार। घरेलू हिंसा की शिकार महिला को वन स्टॉप सेंटर की टीम ने मुक्त कराया। पति सहित ससराुल पक्ष से काउंसलिंग के बाद विवाहिता और उसके बच्चे को मां के साथ भेज दिया है, क्योंकि महिला ने आए दिन के मारपीट से तंग आकर ससुराल जाने से किसी भी सूरत में मना कर दिया था।
चमोली के पोगठा निवासी रीना की शादी पथरी गांव दिगपाल के साथ में हुई है, उसके दो बच्चे हैं, जिनमें वैष्णवी पांच साल व अर्थव दो वर्ष है, लेकिन पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता है। करीब छह बार लोगों ने समझौता कराया, इसके बाद रीना अपनी ससुराल जा चुकी है, फिर भी पति उसके साथ मारपीट करता है। इस पर रीना ने वन स्टॉप सेंटर के महिला हेल्प लाइन नंबर 181 पर कॉल किया गया। देहरादून कॉल सेंटर से वन स्टॉप सेंटर को महिला को ससुराल से लाने के निर्देश दिए गए।
वन स्टॉप सेंटर की टीम पीड़िता की ससुराल पहुंची, जहां से चार फरवरी को पीड़िता और उसके बच्चों को ले आई। उन्हें वन स्टॉप सेंटर के आश्रय गृह में रखने के बाद पीड़िता रीना व पति दिगपाल समेत उसके ससुराल पक्ष ससुर मदन सिंह, सास सास शोभनी के बीच काउंसलिंग कराई गई, लेकिन पीड़िता ने ससुराल जाने से साफ इन्कार कर दिया। कहा कि वह पहले भी अनेक बार मारपीट नहीं करने का आश्वासन देकर ससुराल जा चुकी है, फिर भी उसके साथ मारपीट होती है, इसलिए अब वह किसी भी हालत में अपनी ससुराल नहीं जाएगी। इस पर पीड़िता रीना व उसके दोनों बच्चों को उसकी मां सुभद्रा की सुपुर्दी में दे दिया गया।
इस मौके पर केंद्र प्रशासिका लक्ष्मी, काउंसलर खुशबू देवी, पैरालीगल एडवोकट टीनू शर्मा, महिला कांस्टेबल हेमलता बिष्ट, केस वर्कर ज्योति भटनागर, नीलम सैनी, पीआरडी महिला जवान पूनम, राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।