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अनुमति की आड़ में साफ कर दिया आम का बाग

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जगजीतपुर में मातृसदन आश्रम से करीब दो सौ मीटर दूरी पर काटे गए पेड़ों को दिखाते मातृ सदन के ब्रह्म? - फोटो : HARIDWAR
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कनखल थाना क्षेत्र के जगजीतपुर में लकड़ी माफिया ने अनुमति से ज्यादा आम के पेड़ों पर आरी चला दी। इतना ही नहीं बाग से लीचियों के पेड़ों को काटने के लिए लॉपिंग कर दी थी। मातृसदन की शिकायत के बाद हरकत में आए वन विभाग ने एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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कनखल क्षेत्र बागों के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ सालों से यहां माफिया की नजर लगी हुई और धीरे धीरे करके अनुमति की आड़ में बड़े बड़े बागों का सफाया कराया जा चुका है। जानकारी के अनुसार मातृसदन आश्रम से करीब दो सौ मीटर दूर स्थित एक बाग से शुक्रवार की रात में को आम के 31 पेड़ों को काट दिया गया। सुबह जब लोगों ने पेड़ों को कटा देखा तो चर्चा शुरू हो गई। मातृसदन के संतों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। पता चला कि यह आम का बाग तीन लोगों के नाम है और वन विभाग ने प्रत्येक मालिक को आठ-आठ पेड़ काटने की अनुमति दी थी। बाग से 24 की जगह 31 पेड़ काट दिए गए। यही नहीं बाग में खड़े लीची के 21 पेड़ों को ठिकाने लगाने के लिए भी उन्हें आंशिक रूप से काटते हुए उनकी लॉपिंग बिना अनुमति कर दी गई। जांच पड़ताल होने पर वन विभाग की ओर से कनखल निवासी विपिन कुमार शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रेंजर दिनेश प्रसाद नौड़ियाल का कहना है कि अनुमति से अधिक आम के पेड़ काटने और लीची के पेड़ों की लॉपिंग करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मातृसदन ने अनुमति पर उठाए सवाल
वन विभाग की तरफ से आम के पेड़ों को काटने की अनुमति देने पर मातृ सदन ने सवाल उठाए हैं। संतों का कहना है कि बाग में एक भी पेड़ सूखा और पुराना नहीं था। सभी पेड़ों पर आम आते हैं। ऐसे में अनुमति किस आधार पर दी गई। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा है कि काटे गए फलदार पेड़ों के स्थान पर नए पौधे लगाकर नया बाग तैयार किया जाए, क्योंकि यह अनुमति के दौरान बाग मालिक से हलफनामे में भी लिया जाता है। मातृसदन के ब्रह्मचारी संत दयानंद ने कहा कि सभी पेड़ बिल्कुल सही और हर साल बहुत अधिक मात्रा में फल देते आ रहे थे। उन्होंने कहा कि वन विभाग ने उन्हें खराब पेड़ बताकर आखिर कैसे काटने की अनुमति दी है। कहा कि यह पेड़ों को काटने की एक सुनियोजित साजिश है। एक साथ और एक ही बार में बाग के तीन मालिकों को परमिशन गलत तरीके से दी गई।
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