कुंभ कार्यों में अधूरे पड़े गंगा घाट।
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महाकुंभ 2021 में गंगा से सिक्के और नारियल निकालने वाले गोताखोरों को रोजगार मिलेगा। इन गोताखोरों का स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए एक बचाव दल बनाया जाएगा। इसके लिए मेला प्रशासन ने करीब 100 गोताखोरों का चयन किया है। प्रशासन इनको वर्दी उपलब्ध कराएगा और मानदेय भी देगा।
कुंभ और विभिन्न स्नान पर्वों के दौरान स्थानार्थियों की रक्षा का जिम्मा जल पुलिस के पास होता है, लेकिन अब गंगा में सिक्के और नारियल निकालने वाले गोताखोर गंगा में बहने वाले लोगों की जान बचाएंगे। मेलाधिकारी दीपक रावत महाकुंभ में यह अनोखी पहल करने जा रहे हैं। मेलाधिकारी ने अधिकारियों को स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए एक अलग बचाव दल बनाने के निर्देश दिए थे। बचाव दल के लिए 100 गोताखोरों का चयन किया है। हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर इन गोताखोरों की तैनाती की जाएगी। इस गोताखोरों को मेला प्रशासन वर्दी उपलब्ध कराएगा ताकि इन लोगों को चिह्नित करने में आसानी हो। साथ ही मेला प्रशासन इन गोताखोरों को मानदेय भी देगा। मानदेय के निर्धारण को लेकर मेलाअधिष्ठान के अधिकारियों में विचार विर्मश चल रहा है।
आगे भी बेहद कारगर होगी यह योजना
हरिद्वार में जल पुलिसकर्मियों का टोटा है। बड़े स्नान पर्वों के दौरान दूसरे जिलों से जल पुलिसकर्मी बुलाने पड़ते हैं। लेकिन अब स्नान पर्वों के दौरान गोताखोरों के इस बचाव दल की मदद ली जा सकेगी।
पैरों से पहचान लेते हैं बालू में धंसे सिक्के
ये गोताखोर बड़े अच्छे तैराक भी होते हैं। युवा पानी में खड़े-खडे़ पैरों की उंगलियों से बालू खोदते हैं और सिक्के का स्पर्श पाते ही पानी में गोता लगाकर सिक्के लेकर बाहर निकाल लेते हैं। श्रद्धालुओं के चढ़ाए नारियल आदि भी पानी से निकालकर जमा करते रहते हैं। इनकी तैराकी इतनी जबरदस्त होती है कि पानी के बहाव के विपरीत बड़ी आसानी से तैर लेते हैं। साथ ही तेज बहाव में भी बिना किसी सहारे के टिके रहते हैं।
गंगा से सिक्के और नारियल निकालने वाले गोताखोर बड़े अच्छे तैराक भी होते हैं। इसलिए स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए 100 गोताखोरों का बचाव दल बनाने की योजना तैयार की गई है। इन गोताखोरों को एक निश्चित मानदेय भी दिया जाएगा।
- दीपक रावत, मेलाधिकारी, हरिद्वार