पुलिस द्वारा लौटाए गए लोग वापस आते हुए ।
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कोरोना के प्रकोप से बचाने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के बीच हाईवे पर पैदल ही बच्चों और महिलाओं के साथ चले जा रहे मजदूरों की लंबी कतारों ने भारत पाक के विभाजन के समय की याद ताजा कर दी है। उम्र दराज लोग बताते हैं कि आजाद भारत में कभी भी इस तरह के हालात नहीं देखे। केंद्र सरकार से बुजुर्ग लोगों ने इस स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए प्रभावी इंतजाम करने की अपील भी की है।
शिक्षाविद प्रोफेसर पीएस चौहान ने बताया कि 1947 में आजादी के समय जब देश का विभाजन हुआ तो आज भी उन्हें याद है लोगों की लंबी कतारें इसी तरह सड़कों पर दिखाई दे रही थी। अपना सब कुछ छोड़कर लोग अपने परिवारों, बच्चों महिलाओं के साथ इसी तरह भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत की ओर जाते दिखाई दे रहे थे। उनका दर्द भी देखा नहीं जा रहा था। तब से आजाद भारत में कभी ऐसे हालात दिखाई नहीं दिए। अब फिर ऐसी ही स्थिति दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि सरकार को तुरंत लॉकडाउन करने से पहले इस तरह के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कुछ समय देना चाहिए था। या फिर सख्ती से लॉकडाउन का पालन कराकर उनकी जरूरतों की पूर्ति का सामान मुहैया कराया जाना चाहिए। आधी अधूरी तैयारी के बीच ऐसे लाखों लोगों का सड़क पर उतर जाना इस बात को दिखाता है कि लोग अपने जीवन को लेकर भयभीत हैं। इस स्थिति से जनता को बचाने की जरूरत है। कनखल के बुजुर्ग धर्मपाल धीमान ने भी आजादी के समय का दौर देखा है। उन्होंने बताया कि इस तरह की परिस्थिति आजाद भारत में कभी नहीं दिखाई थी। आज जिस तरह से लोग भयभीत होकर अपने घरों को लौट रहे हैं, बंटवारे के समय पलायन का ऐसा ही नजारा दिखाई दिया था। उस समय भी भारत और पाकिस्तान के बीच अपना जीवन सुरक्षित करने के लिए लोग जा रहे थे।