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स्कूल-कॉलेजों में ताले, कैसे लगेंगे किशोरों को टीके

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कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप से किशोर-किशोरियों के टीकाकरण अभियान को बड़ा झटका लगा है। सोमवार से स्कूल खुलने पर स्वास्थ्य विभाग दोबारा से स्कूल-कॉलेजों में टीकाकरण का विशेष अभियान शुरू करने की योजना बना रहा था लेकिन स्कूल बंद होने से योजना धरी की धरी रह गई। ऐसे में सभी किशोरों को टीके कैसे लगेंगे ये चिंता का विषय है।
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को देखते हुए तीन जनवरी से 15 से 18 साल तक के बच्चों का भी टीकाकरण शुरू कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग को जिले के इस उम्र के एक लाख 65 हजार 450 किशोरों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया था। जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने एक सप्ताह में इसे पूरा करने का दावा किया था। इसके लिए शीतकालीन अवकाश होने के बाद भी स्कूल-कॉलेजों को खोलकर टीकाकरण अभियान चलाया गया था। पब्लिक स्कूलों में तो बच्चों को टीकाकरण की स्थिति ठीक रही थी लेकिन सरकारी स्कूलों में कम ही विद्यार्थी आए। इसपर नौ जनवरी तक तो स्कूलों को खोलकर टीकाकरण किया गया। इसके बाद बच्चे नहीं मिलने पर टीकाकरण बंद कर दिया गया था। तब तक महज लगभग 49 हजार बच्चों को ही टीके लग सके हैं। अब भी एक लाख 16 हजार बच्चे बिना टीका लगाए ही घूम रहे हैं। लक्ष्य को पूरा करने के लिए शीतकालीन अवकाश समाप्त होने पर 17 जनवरी से टीकाकरण का विशेष अभियान स्कूल-कॉलेजों में शुरू करने की योजना बनाई गई थी। कोविड संक्रमण के बढ़ते ग्राफ के कारण कक्षा 12 तक के सभी स्कूल-कॉलेजों को अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है। इससे किशोर-किशोरियों के टीकाकरण का अभियान शुरू नहीं हो सका है। अब केवल ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में किशोर-किशोरियों को टीके लगाए जा रहे हैं।
किशोर-किशोरियों के टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जल्द ही नई योजना बनाकर टीकाकरण शुरू किया जाएगा ताकि सभी बच्चों को टीके लग सकें। - डॉ. कुमार खगेंद्र सिंह, सीएमओ
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