प्राधिकरण का अधिकार क्षेत्र फिर भी नहीं हो किया जा रहा मृदा परीक्षण
घाटी और घाड़ क्षेत्र क्षेत्र में विशेषज्ञ मृदा परीक्षण के बाद ही निर्माण करने की सलाह देते हैं। बता दें कि हरिद्वार जैसी जगह पर आज तक हेलीपैड या एयरपोर्ट की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकी इसका कारण रहा कि यहां के मिट्टी परीक्षण के बाद प्रस्ताव फेल होते गए। लक्सर क्षेत्र में एयरपोर्ट या हेलीपैड बनाने की योजना करीब एक दशक पूर्व तय की जा रही थी, लेकिन मिट्टी के परीक्षण में यह संभव नहीं हो सका। धनौरी क्षेत्र में कई सरकारी भवनों की हालत जर्जर है। सबसे ज्यादा बुरा हाल उत्तर प्रदेश के अधीन आने वाले सिंचाई विभाग के भवनों का है। सिंचाई विभाग के एक जर्जर भवन में पुलिस चौकी भी चल रही है। जहां हमेशा खतरा बना हुआ है। धनौरी में गंग नहर के आसपास उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनेक भवन हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी इन भवनों पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग का स्वामित्व है। उचित देखभाल और मरम्मत के अभाव में अधिकतर भवन गिराऊं हालत में है।
चल रही चौकी भी खतरे की जद में
स्थानीय लोगों के अनुसार सिंचाई विभाग के कई भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। भवनों की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, वहीं कई स्थानों पर छत और प्लास्टर भी खराब हालत में हैं। अधिकतर भवन खाली पड़े हैं और इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है, लेकिन यहां पर एक भवन ऐसा है, जिसमें पुलिस चौकी संचालित हो रही है। जहां पुलिसकर्मी दिनभर जर्जर भवन में बैठकर काम करते हैं वहीं स्थानीय लोगों की आवाजाही थी पुलिस चौकी में बनी रहती है। ऐसे में भवन की जर्जर हालत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो बरसात अथवा किसी अन्य कारण से भवन का कोई हिस्सा गिर सकता है और जान-माल का नुकसान हो सकता है। लोगो का कहना है कि विशेष रूप से पुलिस चौकी वाले भवन की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराकर पुलिसकर्मियों और आमजन की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाए।
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डेढ़ सौ साल से ज्यादा आयु वाले पुल पर भी चल रहे हैं भारी वाहन
धनौरी में केवल भवन ही नहीं बल्कि पुरानी गंगानहर पर बने कई पुल भी जर्जर हालत में हो चुके हैं। नेशनल इंटर कॉलेज के सामने नया पुल बन चुका है लेकिन आज भी करीब डेढ़ सौ साल पुराने पुल पर भारी वाहनों का संचालन जारी है। यह पुल कभी भी हादसों का सबब बन सकता है। पुल पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से जर्जर होने का बोर्ड लगा दिया गया है लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कोई ठोस खत्म नहीं उठाए गए हैं। हरिद्वार से हरियाणा और पंजाब की ओर जाने वाले अनेक यात्री वहां किसी पुल से होकर गुजर रहे हैं। मालवाहक वाहन भी इसी पुल से गुजरते हैं। यह पुल कभी भी भरभराकर नीचे गिर सकता है जिससे कोई बड़ा हादसा हो सकता है।