खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया
खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और इसे अपनी पिछड़ा समाज से होने की पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाए। ऐसे में हल्द्वानी के अनुसूचित जाति के चेहरे दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया जाना उस विवाद के बाद भाजपा के लिए एक अलग राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर आर्य की उम्मीदवारी को खरगे प्रकरण से नहीं जोड़ा है।
इसलिए इसे सीधे उस विवाद की प्रतिक्रिया के बजाय पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के व्यापक समीकरण से जोड़कर देखना अधिक उचित होगा। दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को केवल जातीय समीकरण के नजरिए से देखना भी पर्याप्त नहीं होगा। वह लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह नैनीताल जिला भाजपा अध्यक्षरह चुके हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वर्तमान में वह दायित्वधारी हैं। 2017 और 2022 में वह नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के दावेदार रहे। इस बार भी उन्हें प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था लेकिन राज्यसभा भेजकर पार्टी ने विधानसभा टिकट की संभावित दावेदारी के साथ ही उससे बनने वाले गुटीय समीकरणों की संभावना पर भी विराम लगा दिया है