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चार शंकराचार्यों को ही आवंटित कराएंगे भूमि

Sat, 29 Apr 2017 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की प्रतीक्षित बैठक रविवार को प्रयाग की वागंभरी पीठ पर हो रही है। बैठक में परिषद  संगम तट पर सेना के अधिकार में चल रहे प्राचीन किले को पुरातत्व संपत्ति घोषित करने की मांग भी करेगी। हालांकि फर्जी संतों पर कार्रवाई पर असमंजस बना हुआ है। परिषद का कहना है कि प्रयाग अर्द्धकुंभ में भूमि आवंटन केवल चार शंकराचार्यों के नाम कराया जाएगा। फर्जी शंकराचार्यों को कुंभ मेला क्षेत्र में भूमि नहीं लेने दी जाएगी।  

प्रयाग रवाना होने से पहले अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने उठाए जाने वाले विषयों की जानकारी दी। कहा कि शंकराचार्य पद पर आसीन हुए संतों को अखाड़ा परिषद पहले ही बहिष्कृत कर चुकी है। आने वाले प्रयाग अर्द्धकुंभ में भूमि आवंटन केवल चार शंकराचार्यों के नाम कराया जाएगा। फर्जी शंकराचार्यों को कुंभ मेला क्षेत्र में भूमि नहीं लेने दी जाएगी। अलबत्ता ऐसे संत महामंडलेश्वर के रूप में भूमि आवंटन की मांग कर सकते हैं। शंकराचार्य के रूप में केवल चार पीठों के शंकराचार्यों को ही संत क्षेत्र में भूमि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संगम तट पर विद्यमान प्राचीन किला अंग्रेजों के जमाने से सेना के नियंत्रण में चला आ रहा है। परिषद मांग करेगी कि इस किले को पुरातत्व का प्राचीन स्थल घोषित किया जाए। इस आशय का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के साथ साथ प्रधानमंत्री को भी भेजा जाएगा। पुरातत्व क्षेत्र घोषित होने के बाद इस किले में आमजन भी दर्शानार्थी बनकर प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि संगम तट स्थित लेटे हनुमान संत जगत के लिए ही नहीं अपितु पूरे देश के लिए श्रद्धा का केंद्र हैं। यह एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें भगवान महावीर लेटे हुए हैं। चर्चा के अनुसार अकबर जब हनुमान की प्रतिमा को हटाकर दिल्ली ले जा रहा था, तब हनुमान ने हठ धारण कर लिया और वे जमीन पर लेट गए। लेटे हनुमान को अकबर की पूरी सेना भी फिर वहां से हटा नहीं पाई। इस मंदिर पर भी टीन की छत पड़ी हुई है। वर्ष 2019 के अर्द्धकुंभ में अखाड़ा परिषद इस स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण करेगी।      
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परिषद के महामंत्री ने बताया कि प्रयाग का समूचा मेला क्षेत्र छावनी क्षेत्र में पड़ता है। यह क्षेत्र यदि अलग हो जाए तो अधिक विकास संभव है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने से तमाम स्नान क्षेत्र रेत से भरा हुआ है। इस क्षेत्र में पक्के घाटों का निर्माण जरूरी है, ताकि करोड़ों तीर्थयात्री आराम से स्नान कर सकें। अखाड़ा परिषद ऐसी मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के साथ- साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी करेगी। परिषद की बैठक में पत्थरबाजों को रोकने और नक्सलपंथियों को मिटाने से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।    
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