मातृसदन की ओर से तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे पर लगाए गए कोर्ट की अवमानना के आरोप की दोबारा सुनवाई होगी। एडीजे तृतीय कोर्ट ने ब्रह्मचारी दयानंद की अपील पर सुनवाई करते हुए लोअर कोर्ट को यह आदेश दिए हैं।
मातृसदन के अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया के मुताबिक दिसंबर वर्ष 2012 में मातृसदन के ब्रह्मचारी पूर्णानंद का अनशन चल रहा था। मांग पूरी न होने पर अनशन जारी रहा। इस पर प्रशासन की तरफ से पूर्णानंद के खिलाफ कनखल थाने में आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया गया। 22 दिसंबर 2012 को कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी को आदेशित किया था कि पूर्णानंद को समुचित उपचार दिलाया जाए। जौलीग्रांट में भर्ती पूर्णानंद का उपचार करते हुए चिकित्सकों के पैनल ने 26 दिसंबर 2012 को तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे को एक पत्र भेजा। जिसमें ब्रह्मचारी पूर्णानंद को हायर सेंटर रैफर करने की संस्तुति की गई थी। डीएम ने चिकित्सकों के पत्र का संज्ञान नहीं लिया। मातृसदन ने इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला बताते हुए अधिवक्ता अरुण भदौरिया के माध्यम से लोअर कोर्ट में वाद दायर किया था। सुनवाई के दौरान लोअर कोर्ट ने ब्रह्मचारी दयानंद बनाम सचिन कुर्वे का मामला खारिज कर दिया। जिसके बाद मातृसदन ने ऊपरी अदालत में अपील की।
एडीजे तृतीय विध्यांचल सिंह ने अपील स्वीकार करते हुए सुनवाई की। एडीजे कोर्ट ने लोअर कोर्ट को आदेश दिए हैं कि मामले की सुनवाई दोबारा से की जाए। गौरतलब है कि वर्ष 2012 में हरिद्वार जिलाधिकारी रहे सचिन कुर्वे फिलहाल नागपुर महाराष्ट्र में तैनात हैं। हरिद्वार से तबादले के बावजूद मातृसदन का सचिन कुर्वे का मुकदमा लगातार जारी है।