हरिद्वार। माघ मास कृष्ण पक्ष की गंगा पंचस्नानी बृहस्पतिवार को शुरू हुई। अब सोमवार तक पांचों दिन पंचस्नानी करने आए श्रद्धालु प्रतिदिन गंगा में डुबकी लगाएंगे। स्नानों का समापन मौनी अमावस्या के दिन स्नान से होगा।
तिल पर्वों के चलते षटतिला एकादशी पर स्नान का शास्त्रों में भारी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने के बाद यदि तिल से बने पदार्थों को दान किया जाए, तो मोक्ष प्राप्त होता है। यूं, तो पूरा माघ मास पवित्र माना गया है, लेकिन इस मास दोनों पक्षों में एकादशी से अमावस्या तथा पूर्णिमा तक के स्नान विशिष्ट हैं। शुक्ल पक्ष की पंचस्नानी जया एकादशी के दिन 18 फरवरी को शुरू होगी। बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद गुड़, तिल आदि से बने पदार्थों को दान किया। इस एकादशी को चावल का दान नहीं दिया जाता।
आश्चर्यजनक रूप से पंचस्नानी करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही। माना जा रहा था कि सोमवती अमावस्या के पूर्व पांच दिन नहाने के लिए विशेष रूप से पंजाब और जम्मू से बड़ी संख्या में स्त्री श्रद्धालु धर्मनगरी में आएंगी। अर्द्धकुंभ के चलते स्नानार्थियों की संख्या और बढ़ने की संभावना थी। अलबत्ता पंचस्नानी के पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धलुओं से डुबकी लगाई। महीने भर हरिद्वार में रुक कर माघ मास का कल्पवास करने वालों की संख्या भी पहले ही बहुत कम है।