भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण सुधीर जाधव को पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाने से पाकिस्तान में मारे गए पंजाब निवासी सरबजीत सिंह के परिवार के जख्म ताजा हो गए। सरहद पार जाकर संघर्ष करने के बावजूद अपने भाई को खोने वाली दलबीर कौर ने कहा कि सरकार तत्काल इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए और टेबल पर बैठकर पाकिस्तान से सुबूत मांगे। दलबीर कौर ने चेताया कि यदि सरकार ने पहले की तरह ढील बरती तो जाधव का अंजाम भी सरबजीत जैसा हो सकता है।
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण सुधीर जाधव को पाकिस्तानी सेना की अदालत ने जासूसी और अशांति फैलाने के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। जाधव से पहले फांसी की सजा पाए सरबजीत सिंह को लगभग 23 साल पाकिस्तान की जेल में गुजारने पड़े और वर्ष 2013 में कोट लखपत जेल में कैदियों के हमले से सरबजीत की मौत हो गई। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में कहा कि हमें पाकिस्तान पर भरोसा कर चैन से नहीं बैठना चाहिए। ट्रायल, केस वगैरह का इंतजार न कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे उठाया जाए। पाकिस्तान से फेस टू फेस पूछा जाए कि आपके पास जाधव की जासूस या अशांति फैलाने के सुबूत हैं तो हमें सौंपे और जाधव रॉ का एजेंट नहीं है, इसके सुबूत हम पाकिस्तान को दें। दलबीर कौर ने पाक के दावों पर सवाल उठाए कि यदि जाधव रॉ का एजेंट था तो वह पासपोर्ट और वीजा लेकर पाकिस्तान में क्यों जाएगा। यदि पाकिस्तान को पता था कि जाधव जासूस है तो पहले वीजा देने वाले अपने अधिकारियों पर कार्रवाई करे।
पाकिस्तान पर बरसते हुए दलबीर कौर ने कहा कि हमें जैसे को तैसा जवाब देना चाहिए। जब तक हम लोग भी उनके लोगों के साथ ऐसा नहीं करेंगे, न जाने कितने सरबजीत पाकिस्तान में बेगुनाह मारे जाते रहेंगे।
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भारतीय कैदियों को छुड़ाएं पीएम
दलबीर कौर ने बताया कि उन्होंने लाहौर हाईकोर्ट से 300 भारतीय कैदियों की सूची लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सौंपी है। इन सभी को छुड़ाया जाना चाहिए। पूरे देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें हैं। सबको पता है कि यदि पाकिस्तान को कोई सबक सिखा सकता है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। कहा कि अब समय चेतावनी या भाषण का नहीं है, पीएम मोदी को कुलभूषण जाधव सहित पाकिस्तान की जेलों में बंद अपनों को छुड़ाकर लाना चाहिए।
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जाधव और सरबजीत के केस में सभी समानताएं
जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने से पूरे देश की आंखों में सरबजीत का चेहरा उतर आया है। खुद दलबीर कौर मानती हैं कि जाधव और सरबजीत के केस में सारी बातें समान हैं। जैसे सरबजीत को भी बिना ट्रायल फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे भी किसी ने नहीं पहचाना था। जेल में शराब की केतली मिली थी और कुबूलनामा उर्दू में लिखा गया। जिस पर साइन या अंगुठे के निशान भी नहीं थे। दलबीर कौर ने कहा कि उर्दू और अंग्रेजी में पूरी कार्रवाई की गई। सरबजीत बेचारा जेल में बैठा रहता था और उसका पक्ष सुने बगैर फांसी की सजा सुना दी गई। दावा किया कि जो चश्मदीद बनाए गए थे, उन्होंने भी बाद में पोल खोल दी थी कि दबाव में गवाही दिलाई गई थी।