हरिद्वार। गंगा में जल की कमी लगातार बढ़ रही है। अस्थि प्रवाह घाटों से गंगा काफी दूर हो गई है। लोगों को घाटों की सीढ़ी उतरकर काफी आगे जाकर अस्थियां प्रभावित करनी पड़ रही हैं। पिंडदान व अन्य कर्मकांड कराने वाले घाटों पर भी यही स्थिति बनी है। भागीरथी बिंदु से गंगा की अविरल धारा पूरी तरह से सूख गई है।
अस्थि प्रवाह के लिए हरकी पैड़ी और कनखल में सती घाट अधिकृत हैं। इन दोनों घाटों पर गंगा तटों से दूर चली गई है। कुशावर्त घाट पर जहां कि सभी प्रकार कर्मकांड संपन्न होता है, जल करीब दस फीट पीछे चला गया है। कुछ स्थानों पर तो एक फुट तक पानी नहीं है। नारायणी प्रेत शिला पर होने वाले पितृ कर्मों के पश्चात पिंड आदि सामग्री गणेश घाट पर बहाई जाती है। इस घाट पर गंगा दूर हो गई है। परिणाम स्वरूप कर्मकांड करने के बाद श्रद्धालुओं को स्नान के लिए बनी रेलिंग लांघ कर जाना पड़ रहा है। कनखल के सती घाट पर जल बहुत दूर चला गया है। यहां अस्थियां प्रवाहित होने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यहीं हाल हरिद्वार, कनखल और चंडी घाट के तीन श्मशान घाटों का है। शवदाह से लोग शवों का गंगा जल से स्नान भी ढंग से नहीं करा पा रहे हैं। शवदाह के उपरांत साथ आए लोगों को गंगा स्नान करने में भी काफी परेशानियां हो रही हैं। यहीं हाल स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की है। हरकी पैड़ी घाट पर स्नान के लिए बहुत कम जल है। सुभाष घाट, गऊ घाट, कुशा घाट, हनुमान घाट, श्रवण घाट, राम घाट, विष्णु घाट, बिरला घाट, राज घाट, विश्वकर्मा घाट, कबीर घाट आदि जल की कमी बनी हैं। गंगा की अविच्छिन धारा में एक बूंद पानी नहीं है। उत्तरी हरिद्वार में नीलधारा स्थित घाटों पर दूर-दूर तक जल दिखाई नहीं पड़ रहा है।