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बिजली कटौती से हांफने लगे उद्योग

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रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में कोविड लॉकडाउन से कच्चा माल नहीं मिलने से प्रभावित सिडकुल की औद्योगिक इकाइयों पर अब बिजली कटौती की मार पड़ रही है। अघोषित कटौती से उद्योग हांफने लगे हैं। रोजाना घंटों कटौती से मजदूर खाली बैठे रहते हैं और मशीनें बंद। जनरेटर चलाने का खर्च 30 रुपये यूनिट से अधिक पड़ रहा है। जनरेटर कारखानों की बड़ी मशीनों को चलाने का लोड नहीं उठा पा रहे हैं। इससे कारखानों में उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। उद्यमी परेशान हैं।
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सिडकुल में छोटे-बड़े सैकड़ों उद्योग हैं। उद्योगों के लिए बिजली की आपूर्ति सबसे पहली जरूरत है। उद्योगों में तैयार होने वाला सामान देश-विदेश जाता है। फार्मा सेक्टर की कई कंपनियां विदेशों को दवाएं भेजती हैं। रूस-यूक्रेन और चीन से कच्चा माल मंगवाती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से कच्चा माल आना बंद है। आर्डर भी रद्द हो गए हैं और करोड़ों रुपये फंसे हैं। चीन के कई बड़े शहरों में भी कोविड लॉकडाउन लगा है। चीन से भी कच्चा माल आना बंद हो गया है। भारत में कच्चा माल का स्टॉक करने वालों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।
कच्चा माल महंगा खरीदने के बाद भी उद्योगों में उत्पादन पर बिजली कटौती का करंट लग रहा है। उत्पादन प्रभावित होने से उद्यमियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि गर्मी की शुरुआत में कटौती होने लगी है। मई-जून में कटौती बढ़ेगी तो उद्योग चलाना मुश्किल हो जाएगा। उद्यमियों ने सरकार से औद्योगिक क्षेत्र में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है।
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उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश है। इसके बाद भी बिजली की अघोषित कटौती हो रही है। उद्योगों पर इसका असर पड़ रहा है। बिजली गुल होने पर जनरेटर चलाना पड़ रहा है। यूपीसीएल को औद्योगिक क्षेत्र में 24 घंटे की बिजली आपूर्ति करनी चाहिए।
- हिमेश कपूर, अध्यक्ष सिडकुल इंटरप्रेयर वेलफेयर एसोसिएशन
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बिजली की दरें लगातार बढ़ रही हैं। उद्योगों के लिए बिजली दर बढ़ने से ज्यादा जरूरी नियमित आपूर्ति है। प्रदेश सरकार विद्युत आपूर्ति सुधारने का लगातार आश्वासन दे रही है। उद्योगों को विद्युत सप्लाई नियमित मिलनी चाहिए, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
- हरेंद्र गर्ग, अध्यक्ष सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
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बिजली कटौती से इंडस्ट्री सेक्टर इससे बेहद प्रभावित है। मजबूरी में जनरेटर चलाना पड़ रहा है, लेकिन अधिक लोड नहीं लेने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। बिजली कटौती होने पर मजदूरों को खाली बैठना पड़ता है।
- राज अरोड़ा, महासचिव सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
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हालात बहुत खराब हैं। बिजली आने और जाने का कोई समय नहीं है। अघोषित बिजली कटौती से इंडस्ट्री चलाना मुश्किल हो रहा है। रूस-यूक्रेन का सीधा प्रभाव फार्मा इंडस्ट्री पड़ा है। अब चीन के कई शहरों में कोविड के चलते लॉकडाउन लगने से कच्चा माल आना बंद हो गया है। फार्मा सेक्टर को 40 फीसदी तक महंगा कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है।
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- अनिल शर्मा, अध्यक्ष फार्मा इंडस्ट्रीज
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