रानीपुर क्षेत्र के गांव दादूपुर में रविवार की देर रात जमकर बवाल हुआ। गोकशी की सूचना पर छापा मारने पहुंची पुलिस को भारी पथराव के कारण उल्टे पांव दौड़ना पड़ा। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाकर पुलिस ने गोकशी के तीन आरोपी धर दबोचे जबकि कई फरार होने में कामयाब रहे। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को कई राउंड हवाई फायर भी करने पड़े, लेकिन पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है।
घटना रविवार रात करीब दस बजे की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव में एक व्यक्ति के घर गोकशी हेा रही है। गैस प्लांट चौकी प्रभारी अभिनव शर्मा की अगुवाई में पुलिस टीम ने गांव में छापा मारा तो इससे ग्रामीण भड़क गए। गुस्साए ग्रामीणों ने एकाएक पथराव कर पुलिस को भागने पर मजबूर कर दिया। गांव के हालात देखते हुए चौकी प्रभारी ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स गांव में पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए गांव में चिह्नित घर पर छापा मारा। मौके से करीब 47 किलो गोमांस, छुरे, कुल्हाड़े, बाट और तराजू बरामद हुए हैं। इस बीच तीन आरोपी हत्थे चढ़ गए। कोतवाली प्रभारी प्रदीप बिष्ट ने बताया कि आरोपियों के नाम साजिद पुत्र हमीद निवासी दादूपुर सलेमपुर, जाकिर पुत्र फारूख निवासी गांव मुंडलाना बिजनौर एवं शाहिद पुत्र अब्दुल निवासी मोहल्ला पठानपुरा नजीबाबाद, बिजनौर हाल निवासीगण दादुपुर हैं।
जबकि मकान का मालिक मुंतजीर और सलीम अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया। आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड गोवध संरक्षण अधिनियम, सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
चौकी प्रभारी को चोटें आईं
पथराव में चौकी प्रभारी अभिनव शर्मा को भी चोट आई। पूछने पर उन्होंने स्वीकारा कि चोट तो लगी है, लेकिन यह चोट फिसलने से सिर पर पत्थर लगने के कारण आई है। हमले जैसी कोई बात नहीं है।
बांध दिए पुलिस के हाथ
दादूपुर सलेमपुर में रविवार की रात जो हुआ वह हर कोई जानता है। लेकिन सियासी माहौल गर्माने के बाद पुलिस के साथ हुए घटनाक्रम पर खुद पुलिस ने ही चुप्पी साध ली। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही पुलिस ने होंठ सिल लिए। पुलिस की यह चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पूरे खेल के पीछे कुछ सफेदपोशों का हाथ बताया गया है।
पांच साल पूर्व भी हुआ था बवाल
सलेमपुर गांव में करीब पांच वर्ष पूर्व भी बवाल हुआ था। तब एक विवाहिता का शव कब्र से निकालने के दौरान हालात बिगड़ गए थे। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर डाला था और दो मोटरसाइकिल भी फूंक दी थी। तब एसओ रहे डीएस पंवार समेत 13 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मौजूदा जिला पंचायत उपाध्यक्ष राव आफाक को तब जेल जाना पड़ा था।