हरिद्वार। शनिवार और रविवार की रात को आई आंधी शहर से लेकर देहात तक के लोगों के लिए भारी मुसीबत लेकर आई। जगह-जगह बिजली की लाइनों पर पेड़ गिरने से आपूर्ति ठप रही। शनिवार रात को आई आंधी के बाद से ठप हुई धनौरी क्षेत्र के 70 गांवों की बिजली आपूर्ति तीन दिन बाद भी सुचारु नहीं हो सकी है। बहादराबाद क्षेत्र में 45 घंटे बाद बिजली सुचारु हुई। पथरी क्षेत्र के गांवों में भी सोमवार दोपहर बाद बिजली आई। शहर के क्षेत्रों में भी कमोबेश यही हाल रहा। रविवार को पूरी रात लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा। कनखल में आधी रात 12.35 बजे आपूर्ति बहाल हुई तो ज्वालापुर में सोमवार सुबह 6.30 बजे आई। उसके बाद दिन में 1.30 बजे आपूर्ति बाधित हुई तो शाम तक सुचारू नहीं हो सकी। मायापुर, भूतपतवाला, खड़खड़ी में रात को तीन बजे सुचारु हो सकी। शहर से लेकर देहात तक के लोगों को बिजली के साथ बिना पानी के भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऊर्जा निगम के अधिकारी और कर्मचारी लाइनों को ठीक करने में जुटे रहे। लेकिन कई जगह फाल्ट ढूंढने में पसीना बहाना पड़ा।
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फीडर से आने वाली लाइन क्षतिग्रस्त
धनौरी। शनिवार सुबह दस बजे बिजली गुल हो गई थी, इस इलाके में मेहवड़ कलां इलाके में ऊर्जा निगम की ओर से हाईटेंशन लाइनों की तारें ठीक की जा रही हैं। उसके बाद शनिवार शाम सात बजे आई आंधी के बाद पूरे इलाके की बिजली गुल हो गई थी। रविवार को ऊर्जा निगम की ओर से बिजली की लाइनों के ऊपर गिरे पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा था। पेड़ हटाने के बाद कई स्थानों पर तारों में जोड़ लगाया गया। उसके बाद भी सोमवार को देर शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई थी।
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पानी भी नसीब नहीं हुआ
बहादराबाद। ग्रामीण राजपाल सिंह, सुधीर चौहान, बब्बू बेकरार, गौरव कुमार, अंकित, अतुल चौहान आदि का कहना है कि टूटी लाइनों का समय पर मरम्मत नहीं होने से हजारों ग्रामीणों को भारी दिक्कतें उठानी पड़ी। बिजली गुल होने के साथ पानी भी नसीब नहीं होता। ऊर्जा निगम को ऐसे मौके पर समय पर काम करना चाहिए। ऊर्जा निगम के अवर अभियंता सुरेश कुमार का कहना है कि कई जगह बिजली की लाइन पर पेड़ गिर गए थे। जिनको ठीक करने में समय लग गया।
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सिडकुल में भी बिजली कटौती से उत्पादन ठप
हरिद्वार। आंधी की मार औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों पर भी पड़ी। सिडकुल क्षेत्र में बिजली की लाइनों पर पेड़ गिरने से शनिवार की रात विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। रविवार की रात को दो बार आई आंधी से पूरी रात फैक्ट्रियों में विद्युत आपूर्ति ठप रही। सोमवार को दिन में रूक-रूककर बिजली गुल होती रही। औद्योगिक इकाईयों में काम नहीं होने से उद्योगपतियों को भी नुकसान उठाना पड़ा। जिन फैक्ट्रियों में रविवार को भी मजदूरों को काम पर बुलाया गया था उन्हें बिजली नहीं होने के कारण लौटाना पड़ा। सिडकुल इंटरीप्रीन्योर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव हीमेश कपूर का कहना है कि बिजली गुल रहने से उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
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50 रुपये में 100 लीटर पानी
धनौरी। ग्रामीण मुनव्वर सलमानी, रामचंद्र सैनी, दिनेशपुरी, राजेंद्र सैनी, देवी गिरि, राजकुमार गुप्ता, प्यारेलाल, जितेंद्र गोस्वामी, सीमापुरी, नंदपाल आदि का कहना है कि ऐसे हालातों से निपटने के लिए ऊर्जा निगम के पास पहले से कोई कार्य योजना ना होने से क्षेत्र की जनता को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा। संचार व्यवस्था ठप है। पशुओं को हरा चारा नही मिल पा रहा है। कुटीर उद्योग धंधे ठप हैं। आटा पिसाई ना होने से ग्रामीण मजबूरी में दुकान से आटा खरीद रहे हैं। ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बिजली ना होने से ग्रामीण पानी के लिए बूंद बूंद के लिए तरस रहे है। क्षेत्र में 100 लीटर पानी 50 रुपये में बेचा जा रहा है। लोग भी मजबूरी में पानी खरीदने को मजबूर हैं। वहीं जल संस्थान की ओर से क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराने के कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किए जा रहे हैं।