गंगा की ढाई हजार (2565) बीघा से अधिक भूमि पर कच्चा-पक्का अतिक्रमण कर अवैध कब्जा कर लिया गया है। सिंचाई खंड हरिद्वार ने अवैध कब्जों की सूची के साथ कई बार जिला व पुलिस प्रशासन से अतिक्रमण हटाने के लिए सहयोग मांगा, लेकिन किसी न किसी व्यस्तता का बहाना पुलिस फोर्स व मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं कराया गया।
राज्य सूचना आयोग ने सचिव, गृह विभाग व सचिव सिंचाई विभाग को गंगा नदी से अतिक्रमण व अवैध कब्जों हटवाने का आदेश दिया था। इसके बाद भी जिला प्रशासन के कान में जूं नहीं रेंगी। शनिवार के जघन्य हत्याकांड ने जन मानस को हिलाकर रख दिया है। जिस साधु ने गंगा नदी की भूमि पर कब्जा कर कुटिया बना रखी है। उसका शिवनगर भूपतवाला में बड़ा आश्रम भी है। इसके बाद भी वह गंगा की भूमि पर अवैध कब्जा करके बैठा था। इस हत्याकांड के बाद एक बार फिर से गंगा की भूमि पर बढ़ते अवैध कब्जों और नशे के कारोबार की ओर लोगों का ध्यान गया है। इससे पूर्व बुजुर्ग कांग्रेस नेता क्षेमानंद जोशी की हत्या और मस्तराम गली की महिला को गंभीर रूप से घायल किया किया गया था। महिला को घायल करने वाले को तो अभी तक पुलिस पकड़ भी नहीं पाई है।
गंगा नदी के किनारे और उत्तर प्रदेश से सिंचाई खंड हरिद्वार को हस्तांतरित आरक्षित मेला भूमि पर हजारों की संख्या में झुग्गी-झोपड़ी बस्ती आबाद हो गई हैं। नीलधारा चंडीघाट और बैैरागी कैंप कनखल में सैकड़ों की संख्या में पक्के निर्माण हो चुके हैं। गंगा को प्रदूषित करने वाले अतिक्रमण व मेला भूमि से अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए चिन्हीकरण कर सूची बनाई गई। सिंचाई विभाग की 2565 बीघा भूमि पर अवैध अतिक्रमण है। विभाग ने कई बार कार्यक्रम बनाया। कई बार तारीख और समय निश्चित किया गया। विभाग ने जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्राली और लेबर की व्यवस्था की, लेकिन ऐनवक्त पर कभी पुलिस नहीं मिली तो कभी मजिस्ट्रेट। जिस साधु की झोपड़ी में हत्याकांड हुआ उसकी टीनें एक बार उखाड़ भी दी गई थीं। एक और ने गंगा किनारे महिला आश्रम बना लिया है। सबकी ऊंची पहुंच है और उल्टे हमें ही धमका देते हैं।
- एनएस कुंडरा, उप राजस्व अधिकारी, सिंचाई खंड हरिद्वार।