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आईआईटी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे अभिभावक

Sun, 12 Jul 2015 12:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/रुड़की
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आईआईटी रुड़की की सीनेट के 73 छात्रों को बाहर निकाले जाने के फैसले को अभिभावक हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। सोमवार को इस संबंध में याचिका दायर की जा सकती है। इसके लिए 20 से अधिक अभिभावक बस से सुबह आठ बजे रुड़की से नैनीताल के लिए रवाना हुए।
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आईआईटी की ओर से 08 जून को आयोजित सीनेट की बैठक में पहले वर्ष दो सेमेस्टर में औसत पांच सीजीपीए से कम अंक लाने पर 73 छात्रों को बाहर निकाले जाने का फैसला सुनाया गया था। बैठक में छात्रों की ओर से संस्थान प्रशासन को दी गई मर्सी अपील पर सुनवाई के दौरान यह निर्णय लिया गया।

इसके बाद 10 जून को इस पर पुनर्विचार के लिए आयोजित सीनेट की एग्जिक्यूटिव कमेटी की बैठक में भी सीनेट के फैसले को बरकरार रखा गया था। इससे निराश अभिभावकों ने शुक्रवार की रात को ही नैनीताल हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की भूमिका तैयार कर ली गई थी। अभिभावकों ने संयुक्त रूप से पैसे भी जुटाए।
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कुशीनगर निवासी दिलीप कुमार पनपानिया ने बताया कि शनिवार को 20 से अधिक अभिभावक बसों के जरिए नैनीताल के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि रविवार को कार्रवाई पूरी करने के बाद सोमवार को याचिका दायर करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि संस्थान का फैसला किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए वे हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाएंगे।


हिंदी पर भारी पड़ रही अंग्रेजी की हुकूमत
आईआईटी में इंजीनियरिंग विषयों में अंग्रेजी की हुकूमत हिंदी पर भारी पड़ रही है। संस्थान से निकाले गए 73 में से ज्यादातर छात्रों की शिकायत थी कि बेहतर तरीके से अंग्रेजी को नहीं समझ पाने के कारण बेहतर रिजल्ट नहीं दे पाए। वहीं दूसरी ओर संस्थान में अब दो वर्ष की जगह एक वर्ष का अंग्रेजी का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है।

वहीं अंग्रेजी विषय में चार सेमेस्टर में आठ क्रेडिट निर्धारित थे। अब क्रेडिट भी घटकर चार रह गए हैं। आईआईटी से निकाले गए छात्रों के अभिभावकों की माने तो ज्यादातर छात्र पहले साल में अंग्रेजी विषय में कमजोर होने के चलते मेहनत के बावजूद अच्छी परफॉरमेंस देने में सफल नहीं हुए।

कुशीनगर उत्तरप्रदेश निवासी अभिाभावक दिलीप कुमार का कहना था कि विभिन्न प्रदेशों आने वाले छात्रों में मेधा की कमी नहीं है लेकिन यहां कठिन विषयों के साथ-साथ अंग्रेजी में पढ़ाई को ठीक से नहीं समझ पाने के कारण छात्रों की मुश्किलें बढ़ी हैं। वहीं दूसरी ओर, संस्थान की ओर से अंग्रेजी विषय पर जोर देना कम कर दिया गया है।

तीन साल पहले संस्थान में प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए दो साल तक अंग्रेजी पाठ्यक्रम की क्लास अनिवार्य थी। इसके लिए दो साल के चार सेमेस्टर में छात्रों को आठ क्रेडिट मिलते थे। लेकिन अब पहले साल के दो सेमेस्टर में ही अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। जिसके लिए छात्रों को चार क्रेडिट मिलते हैं।

गौरतलब है कि क्रेडिट के हिसाब से छात्रों का सीजीपीए भी निर्धारित होता है। ऐसे में बड़ी मात्रा में छात्रों के सेमेस्टर परीक्षाओं में कम स्कोर पाने के बाद अब अंग्रेजी विषय की पढ़ाई पर गंभीरता से सोचने की जरूरत होगी।


बाद में अच्छा करने की संभावना जता रहे छात्र
ऐसा नहीं है कि जो छात्र पहले दो सेमेस्टर में बेहतर सीजीपीए नहीं ला पाए वें आगे भी फिसड्डी साबित होंगे। छात्रों के अनुसार ऐसे सैकड़ों उदाहरण है जिन्होंने बाद के सालों में निर्धारित न्यूनतम सीजीपीए के मुकाबले अच्छा स्कोर पाया है। लेकिन संस्थान में एक साल पहले लागू किया गया नियम तो यही कहता है कि पहले दो सेमेस्टर खराब प्रदर्शन के बाद अच्छे की कोई गुंजाइश नहीं है।

शुक्रवार को संस्थान से 73 छात्रों को बाहर निकाले जाने के बाद शनिवार को संस्थान के छात्रों में रोष दिखाई दिया। संस्थान के  कैफेटेरिया में जमा छात्रों ने कहा कि ऐसे सैकड़ों उदाहरण मौजूद है, जिसमें छात्रों ने पहले साल में कम सीजीपीए लाने के बाद अगले सालों में कहीं बेहतर सीजीपीए हासिल किया और उन्हें सम्मान के साथ डिग्री मिली।

नाम न बताने की शर्त पर छात्रों ने कहा कि संस्थान पहले साल में यह कैसे निर्धारित कर सकता है कि कौन छात्र आगे जाकर अच्छे अंक हासिल नहीं कर सकता। ऐसे में नया नियम बिल्कुल गलत है। छात्रों ने बताया कि आखिर के सालों में अनुशासन, स्पोर्टस सहित विभिन्न गतिविधियों के आधार पर भी अंक मिलते हैं। जिससे सीजीपीए को कवर करने में काफी मदद मिल जाती है।


हॉस्टल में घुसने नहीं दिया गया
बाहर निकाले गए छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें अब हास्टल में भी घुसने नहीं दिया जा रहा है। हास्टल वार्डन उनसे सीजीपीए के बारे में पूछते हैं और फिर कमरे की चाबी देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों के सामने रहने की भी समस्या आ गई है।


छात्रों के साथ आया एनएसयूआई
शनिवार को एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सचिन चौधरी, जिला मंत्री मयंक त्यागी एवं अनुज शर्मा आदि ने आईआईटी पहुंच बाहर निकाले गए छात्रों से मुलाकात की। साथ ही इस निर्णय के विरोध में अभियान चलाए जाने की रणनीति बनाई। उन्होंने बताया कि जल्द ही संस्थान के छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

पोस्टर अभियान चलाएंगे छात्र
आईआईटी के छात्र अब सोशल साइट पर पोस्टर के सहारे संस्थान के विरुद्ध अभियान चलाएंगे। छात्र अभिषेक ने बताया कि इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। वहीं राजस्थान सहित विभिन्न प्रदेशों के छात्र एवं उनके अभिभावक निर्णय की जानकारी मिलने के बाद शनिवार को संस्थान पहुंचे।

उन्होंने बताया कि देर से सूचना मिलने के कारण वे शुक्रवार को नहीं आ पाए थे। इन्होंने संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। लेकिन अवकाश होने के कारण उनकी किसी से मुलाकात नहीं हो सकी।
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