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पंखें सब खराब, परेशान हो रहे मरीजों से लेकर डाक्टर साहब

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यदि आप बुखार से तप रहे हैं और उपचार करवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्वालापुर जा रहे हैं तो अपने साथ हाथ का पंखा भी ले जाएं। अस्पताल के 15 से अधिक पंखे खराब पड़े हैं। ओपीडी में चिकित्सक पसीने से तरबतर हो रहे और मरीजों को मर्ज बढ़ रहा है। कई बार मरीज गर्मी से बेहाल होकर गश खाकर गिर रहे हैं।
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30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्वालापुर की स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली किसी से छुपी नहीं है। अस्पताल पहले से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यही कारण है कि मरीज यहां आना ही नहीं चाहते। जो आते भी हैं उनके मर्ज का इलाज होने की बजाय बढ़ता है। 30 बेड का होने के बाद भी यहां कोई मरीज भर्ती नहीं किया जाता। प्रसव के लिए भी सिर्फ उन महिलाओं को भर्ती किया जाता है जिनकी स्थिति सामान्य होती है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
इसके बाद भी सीएचसी में सामान्य बीमारियों के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां प्रतिदिन 150 मरीजों की ओपीडी होती है। अमर उजाला ने मंगलवार को अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं की पड़ताल की। अस्पताल में मरीजों से लेकर डाक्टर पसीने से भीगे दिखे। जानकारी लेने पर पता चला कि कई दिनों से ओपीडी और परिसर में लगे पंखे नहीं चल रहे हैं। किसी पंखे की मोटर खराब है तो किसी की वायरिंग जली हुई है।
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खास बात यह है कि अस्पताल के चिकित्साधिकारी कक्ष का पंखा भी खराब मिला। चिकित्साधिकारी कक्ष में कर्मचारी मरीजों की जांच के लिए खून के सैंपल ले रहे थे। वहां सैंपल ले रहे कर्मचारी ने बताया कि सभी जगह के पंखे खराब पड़े हैं। कब सही होंगे पता नहीं। हालांकि, डाक्टरों ने खराब पंखों के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
40 डिग्री से ऊपर चल रहा तापमान
प्रदेश के साथ हरिद्वार में पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। हरिद्वार मैदानी इलाका होने के कारण चिलचिलाती धूप के साथ लू के थपेड़े लोगों को परेशान कर रहे हैं। पिछले दिनों तो तापमान 43 डिग्री पार कर गया था। सोमवार और मंगलवार को भी तापमान 42 डिग्री रहा। ऐसे में अस्पताल में बिना पंखों के काम करना कितना मुश्किल हो रहा होगा। इसका अंदाज लगाया जा सकता है।
मरीज बोले पहले पंखों का इलाज करे विभाग
अस्पताल में उपचार करने के लिए पहुंचे शमशेर अहमद और आदर्श कुमार का कहना था कि यहां यदि कोई स्वस्थ आदमी भी आएगा तो बीमार हो जाएगा। बिना पंखे के मरीज और उनके तीमारदार कहीं भी आराम से नहीं बैठ सकते। इन लोगों का कहना था कि स्वास्थ्य विभाग को सबसे पहले सभी पंखों को ठीक करवाना चाहिए।
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अस्पताल परिसर और ओपीडी के खराब पंखों को मरम्मत के लिए भेजा है। लंबे समय से पंखों की सर्विसिंग नहीं हुई थी। लगातार चलने से पंखे खराब हो गए।
- डॉ. धीरेंद्र सिंह, अधीक्षक, सीएचसी ज्वालापुर
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