मानसून सीजन फसल और बागवानी के लिए बेहद फायदेमंद है। इस मौसम में आम, अमरूद, अनार, आंवला, लीची, कटहल, अंगूर और नींबू वर्गीय फल पौधों का रोपण होता है। पौधे लगाने से पहले मृदा परीक्षण करने के अलावा गड्ढों को खोदकर दस दिन तक खुला छोड़ना जरूरी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि वर्षाकालीन फलदार पौधों के बगीचे समुद्रतल से 1500 मीटर ऊंचाई तक लगाए जा सकते हैं। किसानों को ध्यान देना जरूरी है कि जिसकी बाजार में खपत अधिक है उसे ही लगाएं। भूमि का चुनाव एवं मृदा परीक्षण जरूरी है। मृदा परीक्षण से कार्बन की मात्रा, पीएच मान (पावर ऑफ हाइड्रोजन या पोटेंशियल हाइड्रोजन) एवं चयनित भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके। फलदार पौधे पथरीली भूमि को छोड़कर सभी तरह की भूमि में पैदा लगाए जा सकते हैं। परंतु जीवांशयुक्त बलुई दोमट भूमि जिसमें जल निकास की व्यवस्था हो सर्वोत्तम रहती है।
डा. पुरुषोत्तम कुमार बताते हैं किसान पौध लगाने से पहले चिह्नित जगह पर गढ्ढे खोदकर 10 दिनों के लिए खुला छोड़ दें। ताकि सूर्य की तेज गर्मी से कीडे़ मर जाएं। गड्डा खोदते समय पहले ऊपर की छह इंच तक की मिट्टी खोदकरअलग रख लें। इस मिट्टी में जींवास अधिक मात्रा में होते हैं। गड्डे भरते समय इस मिट्टी को पूरे गड्डे की मिट्टी के साथ मिलाएं। इसके पश्चात अच्छी सड़ी गोबर की खाद या कंपोस्ट जिसमें ट्रायकोडर्मा मिला हुआ हो मिट्टी में मिलाकर गढ्ढों को जमीन की सतह से लगभग 20 से 25 सेमी ऊंचाई तक भर दें।
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इनके लगा सकते हैं पौधे
- आम: बांबे ग्रीन, बांबे यलो, दशहरी, लंगड़ा, चौंसा। बौनी आम्रपाली ,मल्लिका।
- अमरूद: लखनऊ 49, इलाहाबादी सफेदा
- लीची: कलकतिया, रोजसेन्टेड, वेदाना।
- अनार: गणेश, ढोलका, वेदाना।
- आंवला: हाथी झूल, चकय्या, एन-7, एन-6, कृष्णा, कंचन।
- नींबू: कागजी, कागजी कलां, पंत लेमन, पहाड़ी नींबू।