महिला अस्पताल में धरना देती आशा कार्यकत्री ।
- फोटो : HARIDWAR
कई मांगों को लेकर एक सप्ताह से आशा कार्यकर्ताओं के कार्यबहिष्कार पर रहने से गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए भटक रही हैं। इसके अलावा अन्य कई काम भी प्रभावित हो रहे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से सुरक्षित प्रसव और अन्य कार्य कराए जा रहे हैं।
आशा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकत्री एकता यूनियन संगठन के बैनर तले आशाओं ने जिला महिला अस्पताल में 19 अगस्त से कार्यबहिष्कार कर धरना-शुरू कर दिया था। आशाएं मांगों को लेकर शासनादेश जारी कराने की मांग पर अड़ी हैं। आशाओं के कार्यबहिष्कार पर रहने से गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वह अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए भटक रही हैं।
दूसरी तरफ गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर होने वाली जांचें, टीकाकरण और सुरक्षित प्रसव प्रभावित हो रहा है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की रिपोर्ट भी पेंडिंग पड़ गई हैं। ज्वालापुर के सुलेेमान और सलेमपुर के अनुज ने बताया कि आशाओं के कार्यबहिष्कार पर रहने से अपनी मजदूरी छोड़कर उन्हें खुद अस्पताल में जांच और टीकाकरण करने के लिए आना पड़ा है, जबकि पहले आशाएं ही सारा काम करा देती थीं। सरकार को आशाओं को मनाकर शीघ्र हड़ताल समाप्त करानी चाहिए, ताकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के कार्य सही ढंग से चल सकें।
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आशा कार्यकर्ता अपनी जायज मांगों के लिए कार्यबहिष्कार पर हैं। सारा काम आशाएं कर रही हैं और उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार उनकी मांगों को मानकर शासनादेश जारी कर दे, वह भी कार्यबहिष्कार समाप्त कर देंगी।
- राजेश्वरी चौहान, संगठन की अध्यक्ष
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आशा कार्यकर्ताओं के कार्यबहिष्कार पर रहने से कार्य पर असर तो पड़ रहा है, लेकिन अब इस काम में आंगनबाड़ी और एएनएम के सहयोग से कराए जा रहे हैं। जिससे गर्भवती महिलाओं और आशा कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए परेशानी न होना पड़े। - डॉ. अजय कुमार, एसीएमओ