ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में बैठक के दौरान मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के पदाधिकारी ।
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स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ और संयुक्त कर्मचारी परिषद ऋषिकुल के पदाधिकारियों, कर्मचारियों ने देरी से वेतन सहित कई मांगों और अव्यवस्थाओं पर आक्रोश जताया।
प्रदेश महामंत्री दिनेश लखेड़ा और संघर्ष समिति के अध्यक्ष समीर पांडेय ने कहा है कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय की कथनी और कमनी में अंतर है। लिखित समझौता होने के बाद भी डीडीओ कोड बहाल नहीं किया गया। इसी कारण अब आयुष्मान के तहत गोल्डन कार्ड बनने में परेशानियां हो रही है। रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन और उनके देयक लंबित हैं। इस कारण कर्मचारियों को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। संयोजक सचिव शिवनारायण सिंह, संयोजक केएन भट्ट, उपशाखा अध्यक्ष छत्रपाल, मंत्री जयनरायण ने कहा कि कई वर्षों से कर्मचारियों कि पदोन्नति नहीं हुई है। कर्मचारियों के डीए फ्रीज कर दिया गया। कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। एक कर्मचारी एक वर्ष से लापता है। उसके परिजन पत्र लेकर आए तो पत्र भी लेने से इंकार कर दिया गया। कर्मचारी कोरोना महामारी में सजग होकर ड्यूटी करना चाहते हैं, लेकिन उनमें से कुछ कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। उन्होंने लॉकडाउन खुलते ही आंदोलन की चेतावनी दी। इस मौके पर मोहित मनोचा, समीर पांडेय, सुमंत, अरुण, राकेश शामिल हुए।