विश्व के विभिन्न देशों से सर्दियां गंगा तट पर बिताने के लिए पक्षी चल पड़े हैं और रास्ते में विश्राम के लिए हरिद्वार में डेरा डाल रहे हैं। इन दिनों कईं गंगा तटों पर पक्षियों का डेरा जमा हुआ है। इस बार अभी तक इग्रेट और कोर्मोरेंट प्रजातियों के पक्षी ही चिह्नित किए गए हैं। जबकि पिछले वर्ष करीब 40 प्रजातियों के पक्षी गंगा के तटों पर आए थे।
गंगा के तटों पर करते हैं बसेरा
प्रवासी पक्षी भीमगोड़ा बैराज, भीमगोड़ा-चीला नहर और गंगा के नीलधारा तटों पर बसेरा करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बढ़ने और गंगा के टापू घटने का असर पक्षियों की संख्या पर पड़ा है। वर्ष 2005 तक करीब 80 प्रजातियों के पक्षी नीलधारा में चिह्नित किए गए थे।
पिछले वर्ष आधी रह गई थी संख्या
अनुमान है कि इस बार अधिक ठंड पड़ी तो प्रजातियों की संख्या में वृद्धि होगी। प्रवासी पक्षियों का डेरा गंगा के मिस्सरपुर घाट पर भी लगा हुआ है। इसी तरह रुड़की तक जाते-जाते सिमट जाने वाली पुरानी गंगा नहर के तटों पर भी मेहमान पक्षी दिखाई पड़ रहे हैं।
कहां-कहां से आते हैं पक्षी
गंगा की नीलधारा में रूस, चेकोस्लोवाकिया, पोलैंड, उज्बेकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान और ईरान आदि से प्रवासी पक्षी आते रहे हैं। विघटित सोवियत संघ के अन्य देशों से भी प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।
करीब 15 दिन बाद पक्षियों की संख्या बढ़ जाएगी। पिछले वर्षों के मुकाबले इस समय तापमान दो से तीन डिग्री ज्यादा है। जैसे-जैसे तापमान गिरेगा, पक्षियों का आगमन बढ़ता जाएगा। प्रवासी पक्षियों को पुरानी गंगा नहर के भीगे क्षेत्र, मिस्सरपुर और बिशनपुर के शांत घाट अधिक आकर्षित कर रहे हैं।- डॉ.दिनेश भट्ट, पक्षी विज्ञानी, गुरुकुल कांगड़ी विवि