कम नंबर आना कोई गुनाह नहीं है। ऐसा जीवन में चलता रहता है। अभी जीवन में और कई मौके मिलेंगे, जिसमें कड़ी मेहनत के दम पर सफलता के रास्ते और ज्यादा सुगम बनाए जा सकते हैं। यह कहना है रुड़की के एसडीएम मोहम्मद नासिर और एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल का। दोनों अधिकारियों ने सीबीएसई 12वीं के नतीजे आने के बाद अमर उजाला से अपने पढ़ाई के अनुभव साझा किए।
मेरी पढ़ाई पर हावी था खेल: नासिर
एसडीएम मोहम्मद नासिर का कहना है कि वह बचपन से औसत दर्ज के छात्र रहे हैं। हाईस्कूल में सभी छात्र अच्छे नंबर से पास हुए लेकिन मेरे 52 प्रतिशत नंबर आए थे। ऐसे में निराशा हुई पर परिजनों और दोस्तों ने निराश नहीं होने दिया, सभी ने हिम्मत बढ़ाई।
फिर इंटर में अच्छे अंक प्राप्त किए और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए चयन हो गया। जहां 85 प्रतिशत अंकों के साथ उस समय यूनिवर्सिटी टॉप की थी। तब से सफलता का यह सिलसिला जारी है। अगर मैं हाईस्कूल में मिले नंबरों को आधार मानकर ही निराश हो जाता तो आज सफलता के इस मुकाम पर नहीं पहुंचता।
जो छात्र इंटर की परीक्षा में अपेक्षित नंबर नहीं ला पाए वह धैर्य रखे और मेहनत करे। सफलता आपका इंतजार कर रही है।
लगन ने दिखाई सफलता की राह : डोबाल
एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि विद्यार्थी जीवन के शुरुआती दौर में ही मिले झटके में पढ़ार्ई के प्रति मजबूर कर दिया था। पढ़ाई का यह जज्बा सफलता के मुकाम तक ले गया। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल में उन्हें केवल 51 प्रतिशत और इंटर में 52 प्रतिशत अंक मिले थे। लेकिन, मैंने हिम्मत नहीं हारी।
स्नातक में अंकों का प्रतिशत सुधारा और प्रशासनिक सेवा के लिए तैयारी करते हुए दिन रात एक कर दी। जिसके चलते वह आज इस मुकाम तक पहुंचे। यहीं संदेश मैं सभी छात्राें को देना चाहता हूं।