हरिद्वार। वार्षिक स्थानांतरण में तो कुछ गुरुजी ट्रांसफर हुए स्कूलों में जाते ही नहीं हैं। लेकिन, पारस्परिक ट्रांसफर में हुए मनचाहे स्कूलों में भी नहीं जा रहे हैं। इससे विभागीय ट्रांसफर की प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से अनिवार्य वार्षिक ट्रांसफर के लिए अलावा पारस्परिक ट्रांसफर भी किए जाते हैं। इनमें अध्यापक एक-दूसरे के स्कूलों में ट्रांसफर ले लेते हैं। इससे उन्हें अनिवार्य वार्षिक ट्रांसफर की प्रक्रिया से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही उन्हें अपने पसंद के स्कूल में पढ़ाने का अवसर भी मिल जाता है।
दरअसल, शिक्षा विभाग की ओर से दिसंबर में जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) आशुतोष भंडारी की ओर से जिले के 20 अध्यापकों के पारस्परिक ट्रांसफर किए गए थे। इन्हें मनपंसद के दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम स्कूलों में भेजा गया था। अब पारस्परिक ट्रांसफर लेने वाले शिक्षक नए सत्र में वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया में नहीं आएंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी ने ट्रांसफर हुए शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से पारस्परिक स्कूलों में ज्वाइनिंग देने के निर्देश दिए थे, लेकिन कुछ अध्यापकों की ओर से पारस्परिक ट्रांसफर के आदेशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है, क्योंकि वो पुराने स्कूलों में ही पढ़ा रहे हैं। करीब दो महीने बाद भी पारस्परिक ट्रांसफर के बाद भी शिक्षक नए स्कूलों में नहीं जा रहे हैं। इससे आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, क्योंकि गुरुजी अपने अधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
उधर, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) आशुतोष भंडारी का कहना है कि पारस्परिक ट्रांसफर के आदेशों के बाद जिन अध्यापकों की ओर से नए स्कूलों में ज्वाइन नहीं किया गया है। उनकी रिपोर्ट संबंधित उप शिक्षा अधिकारियों से मांगी जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।