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गुरुजी ने ठानी तो माता-पिता ने पढ़ना सीखा

Mon, 22 Feb 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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योगेंद्र सिंह
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हरिद्वार। आमतौर पर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मेहनत के प्रति लोगों की धारणा ठीक नहीं होती। इन सब के बीच सरकारी स्कूलों ऐसे भी शिक्षक हैं जो न सिर्फ बच्चों को पढ़ाने में नए प्रयोग कर रहे बल्कि निरक्षर अभिभावकों को साक्षर बनाने में जुटे हैं। हरिद्वार जिले के बहादराबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जसवावाला के शिक्षक विवेक चौहान ने डेढ़ महीने में 40 अभिभावकों को साक्षर बनवा दिया। यह काम उन्होंने खुद नहीं बल्कि बच्चों से करवाया। शिक्षक विवेक चौहान का कहना है कि यह मुहिम पूरे देश में शुरू हो जाए तो एक भी पैसा खर्च किए बिना देश से निरक्षरता मिट सकती है।
सर्व शिक्षा अभियान, उड़ान, पहल, साक्षरता प्रेरक और अन्य कई तरह के नवाचार कार्यक्रमों के तहत देश से निरक्षरता मिटाने के लिए हर साल करोड़ों रुपया केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से खर्च किया जा रहा है। इसके बाद भी देश में शत प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका। वहीं दूसरी ओर ब्लॉक बहादराबाद स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय जसवावाला के सहायक अध्यापक विवेक चौहान ने स्कूल में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों के अभिभावकों की जानकारी ली जो पढ़ना लिखना नहीं जानते थे। उन्होंने प्रयोग के तौर पर चौथी के 25 बच्चों से उनके 40 अभिभावकों का हाथ पकड़कर पहले लिखना सिखवाया और फिर धीरे धीरे पढ़ना। कुल डेढ़ महीने में ये सभी अभिभावक अपना नाम लिखने के अलावा पूरे परिवार और रिश्तेदारों के नाम ही नहीं लिखने लगे बल्कि किताब भी पढ़नी शुरू कर दी। गुरुजी ने समय समय पर अभिभावकों को स्कूल में बुलाकर प्रेरित किया। कभी कभी उनके घरों पर जाकर मॉनिटरिंग भी की। उन्होंने बताया कि थोड़े से समय में इतना बेहतर परिणाम देखकर दिल को बड़ी तसल्ली मिली।
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ये बच्चे रहे अभियान में शामिल-
राजकीय प्राथमिक विद्यालय के राधिका, सानिया, विपुल, अभिषेक, जोंसी, पूजा, राकिब, अंकुर, अंकित, शबाना, आर्यन, सुजल, शाईस्ता, सारिन, रुकैय्या, शाकिरा, शाबरा, प्रियांशी, शैली, मीनाक्षी, अर्जुन आदि साक्षरता अभियान में शामिल रहे।
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ग्रामीणों ने किया पुरस्कृत
जब ग्रामीणों को गुरुजी और बच्चों के अभियान की जानकारी हुई लोगों ने उनके अभिभावकों से इसकी हकीकत जानी। ग्रामीणों ने बच्चों को पुरस्कृत किया।
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