कृषि विभाग की डेयरी आधारित फसल प्रणाली के तहत किसानों को दी जाने वाली सरकारी अनुदान में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। योजना के तहत गाय खरीदने के लिए दिया जाने वाला 40 लाख रुपये का अनुदान किसानों को देने के बजाय पुरकाजी, मुजफ्फर नगर उत्तरप्रदेश के गाय-भैंस के कारोबारी ठेकेदार को दे दी गई। जबकि शासनादेश में साफ है कि अनुदान केवल लाभार्थियों को ही दिया जाना है।
यह अनियमितता वित्तीय वर्ष 2015-16 के तहत हुई। सभी भुगतान वित्तीय वर्ष के अंतिम माह मार्च में ही किए गए हैं। हद तो यह है कि कृषि विभाग ने लाभार्थियों की ओर से खरीदी गायों का बीमा कराने के लिए बीमा धन भी इसी व्यक्ति की फर्म को जारी कर दिया।
गोविंदपुरी ज्वालापुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सचिन संत की ओर से सूचना का अधिकार के के तहत जुटाए अभिलेखों के माध्यम से कृषि विभाग में केंद्रीय वित्त पोषित कई योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। सचिन ने कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों के सामने भ्रष्टाचार के प्रमाण प्रस्तुत कर दोषियों को दंडित कराने की मांग की। अब उन्होंने केंद्रीय वित्त पोषित कृषि अनुदान योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के अभिलेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेेजे हैं।
डेयरी आधारित फसल प्रणाली में लाभार्थी को गाय स्वयं खरीदने पर कृषि विभाग आवास व आहार के लिए अनुदान देता है, लेकिन कृषि विभाग ने लाभार्थी से पुरकाजी मुजफ्फरनगर के एक ही ठेकेदार से गाय खरीदवाने के साथ ही अनुदान सीधे लाभार्थी को देने के बजाय ठेकेदार को दे दिया। सचिन ने अधिकारियों को बताया कि ठेकेदार के बारे में जब उन्होंने सूचना मांगी थी तो विभाग ने इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। कृषि विभाग में कार्यरत कर्मियों के नाम पर भी भुगतान के प्रमाण प्राप्त अभिलेखों और बिलों में मौजूद हैं। हालांकि जिला कृषि अधिकारी जेपी तिवारी का कहना है कि कुछ भी गलत नहीं किया गया है। सब कुछ ठीक है।